स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़ी इन 5 कहानियों से मिलती है हमें प्रेरणा…

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12 जनवरी 1863 को जन्में नरेन्द्रनाथ दत्त को आज पूरी दुनिया स्वामी विवेकानंद के नाम से जानती है. उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में आज के दिन को ‘नेशनल यूथ डे’ के तौर पर मनाया जाता है. स्वामी विवेकानंद बुद्धि और मानवता का एक मूर्त रूप है. विवेकानंद युवाओं के लिए एक इंस्पीरेशन भी है. उनके जीवन से जुड़ी ऐसी कई कहानियां है जिनसे हमें प्रेरणा मिलती हैं. यहां हम आपको उनके जीवन की कुछ ऐसी कहानियां बताने जा रहे हैं जोकि आपको इंस्पायर करेंगी-

1. अच्छी बुक्स पढ़ें:

स्वामी विवेकानंद को पढ़ने का बहुत शौक था. जब विवेकानंद शिकागो में रहते थे तो वे लाइब्रेरी से बुक्स पढ़ने के लिए बहुत सारी बुक्स लेकर आते थे और उन्हें एक ही दिन में पढ़कर लाइब्रेरी में वापस जमा भी कर आते थे. इस बात से परेशान होकर एक दिन लाइब्रेरियन ने विवेकानंद से कहा कि, ‘जब तुम्हें बुक्स पढ़नी ही नहीं होती तो तुम इन्हें क्यों लेकर जाते हो? इस बात का विवेकानंद ने जब यह जवाब दिया कि उन्होंने यह सब बुक्स पढ़ ली है तो यह सुनकर लाइब्रेरियन काफी हैरान रह गईं. इसके बाद लाइब्रेरियन ने कहा कि वे उनका टेस्ट लेंगी. टेस्ट के लिए उन्होंने उन बुक्स में से एक पेज को चुना और फिर उन्होंने विवेकानंद से बताने के लिए कहा कि यहां क्या लिखा है. इसके बाद विवेकानंद ने बिना बुक को हाथ लगाए बुक में लिखी बातों को बिल्कुल उसी तरह बता दिया.

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2. डर से दूर:

कभी भी डर को अपने आप पर हावी नहीं होने देना चाहिए. विवेकानंद जब 8 साल के थे तो उन्हें अपने दोस्तों के साथ पेड़ पर चढ़ना बहुत पसंद था. एक दिन एक बूढ़े व्यक्ति ने उन्हें पेड़ पर चढ़ने से मना कर दिया. उस व्यक्ति ने विवेकानंद को डराने के लिए कहा कि उस पेड़ पर भूत रहता है. बूढ़े व्यक्ति की बात सुनने के बाद भी वे दोबारा उस पर चढ़ गए. जब उनके दोस्तों ने डरकर यह कहा कि तुम उनकी बात क्यों नहीं सुन रहे हो. तो जवाब देते हुए विवेकानंद ने कहा कि अगर इस पेड़ पर भूत होता तो वह अब तक हमें नुकसान पहुंचा चुका होता.

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3. दयालु स्वाभाव: 

विवेकानंद बेहद दयालु स्वभाव के थे. विवेकानंद जब शिकागो में वर्ल्ड रेलिजियन की पार्लियामेंट में इंडिया और हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व करने के लिए जाने वाले थे तभी उससे पहले उनकी मां ने उनका टेस्ट लिया था. जब विवेकानंद अपनी मां के पास बैठे तभी उनकी मां ने उनसे पास रखा चाकू मांगा. विवेकानंद ने चाकू की नोक की तरफ से उसे पकड़कर लकड़ी वाला हिस्सा अपनी मां को पकडाया. उनकी मां ने चाकू लेकर कहा कि तुम अपने टेस्ट में पास हो गए. इसके बाद उनकी मां ने उन्हें समझाते हुए कहा कि तुमने चाकू का नुकीला हिस्सा खुद पकड़ा इसका यही मतलब हुआ की तुम मुझे चोट नहीं आने से सकते. इसका मतलब है कि तुममें बिना अपना सोचे दूसरों का ध्यान रखने की क्वालिटी है.

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4. बुद्धिमता:

विवेकानंद की बुद्धि बेहद कुशाग्र थी. एक बार वे ट्रेन में सफर कर रहे थे तभी ट्रेन में बैठी कुछ लड़कियों ने उनके पहनावे का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया. उन लड़कियों ने विवेकानंद से कहा कि वे अपनी घड़ी निकालकर दें नहीं तो वे पुलिस में कम्प्लेन कर देंगे. यह सब देखकर विवेकानंद ने उनके साथ मजाक करने का निर्णय लिया. जब लड़कियों ने उनसे यह कहा तो विवेकानंद ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया और बहरा होने की एक्टिंग की. इसके बाद उन्होंने लड़कियों से इशारे में कहा कि वे लिखकर दें कि वे क्या कहना चाह रही हैं. इसके बाद उन लड़कियों ने सारी बातें पेपर पर लिख कर दी तभी विवेकानंद ने कहा पुलिस को आवाज दी और कहा कि मुझे कम्प्लेन करनी है.

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5. एकाग्रता:

विवेकानंद से हमें जो गुण सिखने चाहिए उनमें एकाग्रता सबसे मुख्य है. विवेकानंद एक बार अमेरिका के एक ब्रिज पर खड़े थे तभी उन्होंने देखा कि कुछ लड़के पानी पर तैर रहे एगशेल्स को शूट करने की कोशिश कर रहे हैं पर उनका एक भी निशाना सही नहीं लग रहा था. तभी विवेकानंद उनके पास आए और उन्होंने लड़कों के हाथ से गन ली और 12 बार उन्होंने शूट किया और उनका हर निशाना एगशेल पर जाकर ही लगा. सभी लड़कों ने जब उनसे पुछा कि उन्होंने यह सब कैसे किया तो जवाब देते हुए कहा कि जब आप शूट करते हैं तो आपका पूरा ध्यान आपके लक्ष्य पर होना चाहिए.

Published by Chanchala Verma on 12 Jan 2018

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