होली का त्योहार मनाने के पीछे छिपी है, बुरे पर अच्छाई की जीत की कहानी सहित कई कथाएं

Get Daily Updates In Email

पूरे भारत में होली का त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है. होली को ‘रंगों का त्यौहार’ भी कहा जाता है. इस त्योहार को हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. पूरे देश में ढोल की ताल और रंगों के साथ इस त्योहार को बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है. बात करें इस त्योहार कि इस त्योहार के पीछे भी बुराई पर अच्छाई की जीत की कहानी है. तो चलिए होली के इस मौके पर आपको इससे जुड़ी कुछ पौराणिक कथाएं बताते हैं-

1. भगवान शिव और पार्वती – 

courtesy

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार हिमालय पुत्री पार्वती भगवान शिव से शादी करना चाहती थी पर भगवान शिव अपनी तपस्या में लीन थे. पार्वती जी की मदद के लिए कामदेव आगे आते हैं और भगवान शिव पर प्रेम का बाण चला देते हैं. जिस कारण भगवान शिव की तपस्या भंग हो जाती है. जिससे भगवान शिव काफी क्रोधित हो जाते हैं और अपनी तीसरी आंख खोल देते हैं. भगवान शिव के क्रोध के आग में कामदेव का शरीर भस्म हो जाता है. इस तरह पार्वती जी की आराधना पूरी होती है और भगवान शिव उन्हें अपनी पत्नी के रूप में अपनाते हैं. इस पौराणिक कथा का अर्थ है कि होली की आग में वासनात्मक आकर्षण को प्रतीकात्मक रूप से जला देना चाहिए और सच्चे प्रेम की विजय के रूप में यह त्योहार मनाया जाता है.

2. हिरण्यकश्यप की बहन होलिका और भक्त प्रहलाद

courtesy

इस पौराणिक कथा के अनुसार अत्याचारी हिरण्यकश्यप ने घोर तपस्या के बाद भगवान ब्रह्मा से अमर होने का वरदान मांगा था. उसे वरदान था कि उसे संसार का कोई भी जीव या जन्तु, देवी या देवता, राक्षस या मनुष्य, रात या दिन, पृथ्वी या आकाश, घर या बाहर नहीं मार सकता. वरदान पाने के बाद वो अत्याचारी हो गया था. उसने सब को आदेश दिया था कोई भी उसके अलावा किसी और स्तुति नहीं कर सकता लेकिन प्रहलाद भगवान विष्णु का भक्त था और उस पर भगवान विष्णु की कृपा दृष्टी थी. हिरण्यकश्यप के अनेक प्रयासों के बाद भी वो प्रहलाद को कुछ भी नहीं कर सका. फिर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से प्रहलाद को  जलाकर मरने को कहा. होलिका को वरदान था कि आग उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता. हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन के साथ मिलकर प्रहलाद को मारने की योजना बनाई. होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर आग बैठ गई पर विष्णु भगवान की कृपा से प्रहलाद बच गया और होलिका जल कर मर गई. तभी से बुराई पर अच्छाई की जीत को याद करते हुए होलिका दहन किया जाता है.

Published by Pravesh on 01 Mar 2018

Related Articles

Latest Articles