भारत का ऐसा गांव जहां नहीं खेली जाती होली, इस दिन नहीं निकलता कोई गांव से बाहर

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पूरे देश में होली का त्यौहार बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. सभी इस दिन अपने दोस्तों और अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर इस त्यौहार को खूब एन्जॉय करते हैं. पर अगर हम आपको ये पता चले की हमारे देश में एक गाँव ऐसा है जो होली के दिन रंगों से दूर रहता है… तो आप क्या कहेंगे?

जी हां, आपको भले ही यकीन ना हो लेकिन कसमार के दुर्गापुर गांव में होली नहीं खेली जाती है. इस दिन यहां के लोग रंग, गुलाल से दूर रहते हैं. दुर्गापुर के 11 टोले के सात हजार बच्चे, बूढ़े व जवान रंग-अबीर का नाम सुनकर ही सिहर उठते हैं. प्रखंड के राजस्व गांव में सबसे बड़ी आबादी वाला गांव दुर्गापुर है. गांव में हरलाडीह, डुंडाडीह, परसाडीह, बुटीटांड़, कमारहीर, चड़रीया, ललमटिया, कारूजारा, बरवाटांड़, तिलयतरीया एवं कुसमाटांड़ कुल 11 टोले हैं. सभी टोले प्रखंड की पहचान के रूप में स्थापित दुर्गा पहाड़ी के चारों ओर बसे हैं.

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इसका कारण है गांव में अनिष्ट की आशंका. इस वजह से बीते सौ वर्षों से गांव के लोगों ने होली नहीं खेली है. ग्रामीण परसाटांड़ निवासी सह दुर्गापुर पंचायत के उपमुखिया भीम प्रसाद महतो, विदेशी महतो, डुंडाडीह टोला निवासी चेकेश्वर महतो, भूषण महतो, सुशीला देवी, मालती देवी, मनोज कुमार महतो, विनोद महतो, राजेश महतो, उषा बाला देवी, भूखल महतो, कामदेव महतो, रामदास महतो, योग मोहन महतो, चंडी चरण महतो ने बताया कि ग्रामीणों ने जब कभी होली खेलने का प्रयास किया, तब-तब गांव में अनहोनी हुई.  ग्रामीणों के अनुसार कुछ दशक पहले एक बार एक मलहार परिवार गांव में सामान बेचने आया था, उसे यह पता नहीं था कि क्षेत्र में होली नहीं खेली जाती है. मलहार ने होली खेल ली. इसके दूसरे दिन दुर्गापुर में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई. ललमटिया एवं कमारहीर टोला में भी ग्रामीणों ने होली खेलने का प्रयास किया, तो गांव में दर्जनभर पशुओं की मौत हो गई.

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ग्रामीणों ने बताया कि पूर्वजों से सुने इतिहास के अनुसार एक बार रामगढ़ राजा की रानी के लिए सैनिक झालदा से तसर की साड़ी खरीदकर ले जा रही थी. जिसपर दुर्गापुर के राजा दुर्गा प्रसाद की नजर पड़ी ओर सैनिकों से साड़ी लेकर देखने के बहाने खोल दिया, लेकिन उसे दुबारा समेट नहीं सके. इसकी खबर सैनिकों ने रामगढ़ राजा को दी. राजा को यह बात नागवार गुजरी और दोनों के बीच मनमुटाव हो गया. कुछ समय के बाद रामगढ़ राजा ने दुर्गा प्रसाद पर चढ़ाई कर उन्हें मार डाला. जिस दिन इस क्षेत्र के राजा दुर्गा प्रसाद की हत्या हुई, उस दिन होली थी. उस दिन से गांव के लोग शोक दिवस के रूप में होली नहीं मनाते हैं. यहां के निवासी दुर्गापुर के राजा की बाबा बड़राव के नाम से पूजा-अर्चना करते हैं.

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बुजुर्गों के बाद जब गांव के युवाओं से बात की गई तो उन्होंने बताया कि होली की मस्ती सिर्फ सुनते हैं, लेकिन उसका आनन्द नहीं उठाते. होली के दिन अगर दुर्गापुर गांव के ग्रामीण आसपास के किसी दूसरे गांव में जाते हैं, तो सिर्फ दुर्गापुर निवासी कहने पर लोग रंग अबीर नहीं डालते. दूसरे को देखकर होली खेलने का मन हर किसी को करता है, लेकिन गांव की परंपरा की जब याद आती है, तो लोग स्वतः होली नहीं खेलते. ग्रामीणों ने बताया कि होली के दिन गांव के अधिकांश लोग गांव से बाहर नहीं जाते. पूरे दुर्गापुर में होली के दिन सन्नाटा रहता है.

Published by Chanchala Verma on 01 Mar 2018

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