समाज से निष्कासित महिलाओं का बसेरा है गाँव उमोजा, पुरुषों के प्रवेश पर है पाबंदी

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अक्सर हम ऐसे गांवों के बारे में सुनते हैं जिनमें कुछ खास बातें होती हैं. जैसे कोई गाँव किसी अनहोनी के लिए जाना जाता है तो कहीं कोई अनहोनी उसे फेमस बना देती है. लेकिन आज हम एक ऐसे गाँव के बारे में बात कर रहे हैं जो सिर्फ और सिर्फ महिलाओं के कारण प्रसिद्ध है. अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे! तो हम आपको यह भी बता दें कि इस गाँव में केवल महिलाऐं ही रहती हैं, यहाँ तक कि पुरुषों पर भी इस गाँव में पाबंदी लगाई गई है.

तो चलिए जानते हैं कि कहाँ है यह गाँव ?

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यह गाँव केन्या के समबुरू इलाके में मौजूद है और इस गाँव का नाम उमोजा है. इस गाँव को केवल महिलाओं का गाँव या बिना मर्दों का गाँव भी कहा जाता है. यह इसलिए है क्योंकि यहाँ केवल महिलाऐं ही रहती हैं और इस गाँव में पुरुषों पर भी पाबंदी है.

कैसे बना यह गाँव ?

कहा जाता है कि इस गाँव की शुरुआत 1990 में हुई थी. और यह गाँव ऐसी महिलाओं का बसेरा बना हुआ है जिन्हें किसी ना किसी कुरीति के चलते गाँव से निकाला जा चुका है. बताया जाता है यहाँ महिलाओं के बसने की शुरुआत तब हुई जब यहाँ 15 महिलाओं को रहने के लिए भेजा गया. ये वे 15 महिलाऐं थीं जिनके साथ स्थानीय ब्रिटिश जवानों ने रेप किया था.

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तब से इस गाँव को ऐसी महिलाओं का ठिकाना कहा जाने लगा जो रेप, बाल विवाह, घरेलू हिंसा, खतना और ऐसी ही कई हिंसाओं को झेलने के कारण समाज से बाहर हुई थीं. इसके साथ ही यहाँ एक और काम शुरू हुआ और पुरुषों के यहाँ आने पर भी पाबंदी लगाई गई.

खुद की वेबसाइट भी है मौजूद :

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इस गाँव की खुद की एक वेबसाइट भी बनाई गई है जहाँ गाँव और यहाँ रहने वाली महिलाओं को लेकर कई बातें बताई गई हैं. इस गाँव में फ़िलहाल 250 महिलाऐं और बच्चे रहते हैं. यहाँ की महिलाऐं हिंसा और परिवार में महिलाओं की आश्रितों वाली स्थिति के खिलाफ हैं. महिलाओं के द्वारा इस गाँव में प्राइमरी स्कूल, कल्चरल सेंटर और समबुरू नेशनल पार्क देखने आने वाले टूरिस्ट्स के लिए कैंपेन साइट चलाई जा रही है. ये महिलाऐं पारंपरिक ज्वैलरी भी बनाकर बेचने का काम भी करती हैं.

गाँव में एंट्री के लिए टूरिस्ट्स को देना पड़ती है फीस :

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यहाँ काम कर रही संस्थाओं से ही महिलाओं की आमदनी भी होती है, और इस आमदनी से ही उनके घर का खर्च और बाकि जरूरतें पूरी होती हैं. हालांकि यह भी सच है कि इन महिलाओं के खर्च भी काफी कम होते हैं. नदी किनारे इस गांव की मुखिया के द्वारा कैंपसाइट चलाई जाती है जहाँ सफारी घूमने आने वाले टूरिस्ट्स का ग्रुप रुकता है. ये टूरिस्ट्स इस गाँव को देखने के लिए भी आते हैं. टूरिस्ट्स से गाँव देखने के लिए तय फीस वसूल की जाती है. महिलाओं को इस बात की भी उम्मीद रहती है कि टूरिस्ट्स उनके यहाँ से कुछ खरीद कर भी जाएंगे.

Published by Hitesh Songara on 16 Apr 2018

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