नीमच में छोटी सी चाय की दुकान चलाने वाले की बेटी आंचल बनेंगी फाइटर पायलट

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मध्यप्रदेश की लाड़ली आंचल गंगवाल उत्तराखंड आपदा के समय इंडियन एयरफोर्स द्वारा चलाए गए राहत एवं बचाव अभियान से काफी इंस्पायर हो गई थीं और तब ही उन्होंने भारतीय सेना में जाने का फैसला ले लिया था. सबसे ख़ास बात यह है कि आँचल का यह सपना जल्द ही पूरा होने वाला है. आंचल उन 22 स्टूडेंट्स में से एक हैं जिन्हे इस बार इंडियन एयरफोर्स के फ्लाइंग ब्रांच ने सिलेक्ट किया है. आंचल के लिए यह बहुत बड़ी सफलता है क्योंकि वो एक बिलकुल साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं उनके पिता नीमच के बस स्टैंड पर एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते हैं.

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आंचल को फ्लाइंग ब्रांच में सिलेक्शन की खुशखबरी 7 जून को मिली थी. लेकिन क्या आप जानते हैं इस सफलता को देखने के लिए आंचल को पहले पांच असफलताओं का सामना करना पड़ा था. पांच बार आंचल इंटरव्यू राउंड तक पहुंची थीं लेकिन उनका एयरफोर्स में सिलेक्शन नहीं हो पाया पर इस बात को आंचल ने अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और लगातार प्रयास करती रहीं. इस बारे में बात करते हुए आंचल ने बताया कि, ‘2013 में जब उत्तराखंड में बाढ़ आई थी तो मैं 12 वीं क्लास में थी. मैंने भारतीय सेना द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में पढ़ा और सुना. इस चीज ने मुझे काफी प्रेरित किया और मैंने फैसला कर लिया कि मैं सेना में ही जाऊंगी इस चीज ने मुझे काफी प्रेरित किया और मैंने फैसला कर लिया कि मैं सेना में ही जाऊंगी.’

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आंचल के घर की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी लेकिन वह अपने स्कूल की सबसे होनहार छात्रा थीं इसी के साथ वो स्कूल की कैप्टन भी थीं. स्कूलिंग पूरी होने के बाद उन्हें स्कॉलरशिप मिली और वो पढ़ने के लिए उज्जैन की विक्रम यूनिवर्सिटी आ गईं. लेकिन पारिवारिक हालात की वजहों से वो कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी करती रहीं. आंचल ने लेबर इंस्पेक्टर की परीक्षा भी पास कर ली थी और अभी वो इसकी ट्रेनिंग ले रही थीं. लेकिन आंचल को लगता था कि अगर वो इस नौकरी में रहेंगी तो उन्हें पढ़ने का वक्त नहीं मिलेगा और एय़रफोर्स में जाने का उनका सपना शायद कभी पूरा भी नहीं हो पाएगा. आंचल लगातार एयरफोर्स के लिए तैयारी करने में लगी थीं और एग्जाम भी देती रही थीं. एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट को क्वॉलिफाई करना बिलकुल भी आसान नहीं होता है.

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आंचल के पिता से जब इस बारे में बात की तो वो कहते हैं कि, ‘आर्थिक स्थिति की वजह से कभी उनके बच्चों की पढ़ाई में कोई दिक्कत नहीं आई’. वहीं आंचल की मां का कहना है कि, ‘साथ हमने दिया, मेहनत उसने की. उसके पापा ने भी काफी तकलीफ उठाई. वो सुबह पांच बजे तड़के उठते थे और देर रात को घर आते थे. सिर्फ अपनी बेटी की पढ़ाई पूरी करवाने के लिए वे इतनी मेहनत करते हैं’. बता दें फ्लाइंग ब्रांच के रिजल्ट आने के बाद से आंचल के घर बधाई देने वालों की लाइन लगी हुई है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ट्वीट कर आंचल को इस अचीवमेंट की बधाई और सुनहरे भविष्य की शुभकामनाएं दीं. 30 जून को आंचल हैदराबाद के डुंडीगुल एक साल की ट्रेनिंग पर जा चुकी हैं.

Published by admin on 04 Jul 2018

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