17 साल के यशस्वी जायसवाल को सचिन तेंदुलकर ने गिफ्ट किया बैट, अर्जुन के साथ खेंलेंगे अंडर-19 मैच

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हमारे देश में आज भी ऐसे कई बच्चे हैं जो क्रिकेट रोज खेलते हैं. उनमें से कई बच्चे जो अच्छा खेलते हैं और आगे इस फील्ड में अपना करियर बनाना भी चाहते हैं पर किन्हीं वजहों से वे देश के लिए खेल नहीं पाते हैं. यहाँ हम आपको 17 साल के एक क्रिकेटर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने अपने घर बुलाकर एक स्पेशल गिफ्ट दिया है.

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जी हां, 17 साल के इस क्रिकटर का नाम है यशस्वी जायसवाल जो कि उत्तरप्रदेश के भदोही जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं. बता दें यशस्वी सिलेक्शन अंडर-19 टीम के लिए हुआ है और अब वे सचिन के बेटे अर्जुन तेंदुलकर के साथ श्रीलंका खेलने भी जाएंगे.

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बात की जाए यशस्वी के परिवारिक बैकग्राउंड की तो गांव के रहने वाले यशस्वी के घर में उनकी 2 बड़ी बहने और एक बड़ा भाई भी है. उन्हें बचपन से ही क्रिकेट खेलना बेहद पसंद था लेकिन यशस्वी के पिता की इनकम इतनी ज्यादा नहीं थी कि वे उनके क्रिकेट के लिए पैसे खर्च कर सके. लेकिन यशस्वी का क्रिकेट खेलने का जूनून इस कदर था कि वह उन्हें साल 2013 में वे मुंबई आ गए. मुंबई आकर वे डेयरी में रहे. जहां उन्हें क्रिकेट खेलने के साथ उन्हें दुकान में काम भी करना पड़ा था.

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इसके बाद उन्हें आज़ाद मैदान में मौजूद मुस्लिम यूनाइटेड क्लब ने तंबू में रहने की इजाजत दी, जिसके लिए उनके सामने अच्छा परफॉरमेंस देने की शर्त रखी थी. यहाँ भी उन्हें बहुत स्ट्रगल करना पड़ा था. यहां उनके साथ 6 और बच्चे भी रहते थे.

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सचिन को जब उनके बारे में पता चल तो उन्होंने यशस्वी को मिलने बुलाया. जहां दोनों के बीच 45 मिनट की बातचीत हुई. जहां यशस्वी ने सचिन से अपने कई सारे खेल से जुड़े पहलुओं पर बात की और खेल में किस स्तर पर जा कर कितना सुधार किया जा सकता है इन सब पर एक टिप्स लिए. इस दौरान सचिन ने एक बैट साइन करके मेमोरी के तौर पर भेंट किया.

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यशस्वी को अपना खर्च उठाने के लिए सड़कों पर पानीपुरी तक बेचना पड़ी थी. यशस्वी को कोच ज्वाला सिंह का साथ भी मिला. जहां उनका टैलेंट देखकर ज्वाला सिंह ने यशस्वी का पूरा खर्चा उठाने का फैसला किया. बात करें यशस्वी के खेल की तो उन्होंने 5 सालों में करीब 49 शतक लगाए हैं. जिस वजह से वे अंडर-19 क्रिकेट टीम के लिए सिलेक्ट हुए. अब देखना यह है कि वे कितने अच्छे क्रिकेट क्रिकेटर बनते हैं.

Published by Chanchala Verma on 12 Jul 2018

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