मकर संक्रांति के दिन बनाई जाती है खिचड़ी, इसके पीछे जुड़ी है बाबा गोरखनाथ की पौराणिक कथा

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भारत त्यौहारों का देश है. यहां हर दूसरे तीसरे दिन कोई न कोई त्यौहार मनाया जाता है. इसी महीने की 14 और 15 तारीख को देश में मकर संक्रांति का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा. इस दिन खरमास की समाप्ति होती है और इस दिन के बाद से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती है. यह त्यौहार भी हिंदू धर्म के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है. हर साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही मनाई जाती है लेकिन इस बार संक्रांति 2 दिन यानी 14 और 15 जनवरी को मनाई जाएगी क्योंकि 14 जनवरी को रात के समय सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा. इस दिन घरों में खिचड़ी बनाई जाती है जिस वजह से कई जगहों पर इसे खिचड़ी का त्यौहार भी कहा जाता है. तो चलिए आज आपको बताते हैं कि आखिर संक्रांति के दिन खिचड़ी क्यों बनाई जाती है?

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खिचड़ी बनाने का महत्व हमारे शास्त्रों में भी बताया गया है. खिचड़ी बनाने के पीछे का एक कारण ग्रहों की शान्ति भी बताया गया है. खिचड़ी में चावल को चंद्रमा, काली दाल को शनि और अन्य सब्जियों को बुध गृह का प्रतिक माना जाता है. कहा तो यह भी जाता है कि इस दिन खिचड़ी खाने से ग्रहों की स्थिति भी मजबूत होती है.

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पौराणिक कथा –

इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है. जो कि बाबा गोरखनाथ से जुड़ी है. कहा जाता है कि जब खिलजी ने भारत पर आक्रमण किया था, तो योगियों को खिलजी से संघर्ष करने की वजह से खाने का समय नहीं मिल पाता था. जिस वजह से योगी अक्सर भूखे रह जाते थे और कमजोर हो रहे थे. इस समस्या को देखकर बाबा गोरखनाथ ने इससे निपटने के लिए दाल, चावल और सब्जियों को एक साथ पकाने की सलाह दी. यह भोजन स्वादिष्ट तो था ही साथ ही इससे शरीर को ऊर्जा भी मिलती थी. यह व्यंजन लोगों को बहुत पसंद आया जिसके बाद गोरखनाथ ने इसे खिचड़ी नाम दिया.

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इस खिचड़ी से योगियों की परेशानी भी दूर हुई और वे खिलजी से लड़ने में भी सफल हुए. खिलजी के खिलाफ मिली जीत के बाद गोरखपुर में मकर संक्रांति को विजय दर्शन पर्व के रूप में मनाया जाने लगा. उस समय से लेकर आज तक संक्रांति के दिन गोरखनाथ के मंदिर के पास खिचड़ी मेला लगता है. यह मेला काफी दिनों तक चलता है जिसमें बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है और प्रसाद के तौर पर खिचड़ी बांटी भी जाती है.

Published by Chanchala Verma on 12 Jan 2019

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