स्वामी विवेकानंद के वो 15 अनमोल विचार जिनसे आज भी मिलती है हमें प्रेरणा

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आज यानि 12 जनवरी को नरेंद्रनाथ दत्त यानि स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन है. हिंदू धर्म के मुख्य प्रचारक के रूप में दुनिया भर में अपनी पहचान बनाने वाले स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी सन 1863 को हुआ था. घर पर उन्हें लोग नरेंद्र दत्त नाम से ही पुकारते थे. वैसे तो स्वामी विवेकानंद के जीवन के कई किस्से हैं लेकिन एक किस्सा बहुत लोगों की जुवान से सुनने को मिलता है. वह किस्सा है स्वामी विवेकानंद द्वारा अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन में भाषण देने का. ऐसा कहा जाता है कि 11 सितंबर 1893 को अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन में बड़ी मुश्किल से स्वामी विवेकानंद को थोड़े समय का भाषण देने का मौका मिला था.

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इस विश्व धर्म सम्मेलन में दुनिया भर के अलग-अलग धर्मों के विद्वान आए हुए थे. जब स्वामी विवेकानंद ने अपना भाषण ”अमरीकी भाइयों और बहनों” कह कर शुरू किया तो सुनते ही यहां बैठी जनता ने तालिया बजा दी थीं. स्वामी विवेकानंद के भाषण से अमेरिकी लोग काफी प्रभावित हुए थे. इसके बाद तीन वर्ष तक स्वामी विवेकानंद अमेरिका में रहे और लोगों को भारतीय तत्वज्ञान प्रदान किया था. स्वामी विवेकानंद की कही हुई बातें आज भी लोगों की लाइफ बदल देती हैं. आज भी युवा उनके विचार से प्रेरित होते हैं. तो चलिए हम आपको बताते हैं स्वामी विवेकानंद के वो 15 विचार जो आज भी युवाओं को प्रेरित करते हैं.

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-उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाये.

-सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा.

-दिल और दिमाग के टकराव के बीच हमेशा दिल की सुनो.

-अगर तुम्हें खुद पर भरोसा नहीं है तो तुम सबसे बड़े नास्तिक हो.

-सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव के प्रति सच्चे होना. स्वयं पर विश्वास करो.

-विश्व एक व्यायामशाला है जहां हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं.

-बाहर की दुनिया बिलकुल वैसी है, जैसा कि हम अंदर से सोचते हैं. हमारे विचार ही चीजों को सुंदर और बदसूरत बनाते हैं.

-तुम गीता पढ़ने के मुकाबले फुटबॉल खेलने से स्वर्ग के ज्यादा करीब होगे.

-किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आये– आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं.

-जो अग्नि हमें गर्मी देती है, हमें नष्ट भी कर सकती है, यह अग्नि का दोष नहीं है.

-एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ.

-कभी भी यह मत सोचो कि तुम्हारे लिए, तुम्हारी आत्मा के लिए कुछ भी नामुमकिन है.

-तुम्हें अंदर से सीखना है सबकुछ. तुम्हें कोई नहीं पढ़ा सकता, कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता. अगर यह सब कोई सीखा सकता है तो यह केवल आपकी आत्मा है.

-सच्चाई के लिए कुछ भी छोड़ देना चाहिए, पर किसी के लिए भी सच्चाई नहीं छोड़ना चाहिए.

-सबसे पहले यह अच्छे से जान-समझ लो कि हर बात के पीछे एक मतलब होता है.

Published by Lakhan Sen on 12 Jan 2019

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