जब भारत में छपा था एक लाख का नोट, नेता जी की तस्वीर होती थी उसमें

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नेता जी सुभाष चंद्र बोस एक ऐसे क्रांतिकारी थे जिनके विचारों से लाखों लोग प्रेरणा लेते था. सुभाष चंद्र बोस का जन्म आज ही के दिन यानी 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ था. सुभाष चंद्र बोस एक संपन्न परिवार से थे. नेता जी बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में तेज थे और देश की आजादी में अपना योगदान देना चाहते थे. 1921 में प्रशासनिक सेवा की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर वे देश की आजादी की लड़ाई में उतरे थे. सुभाष चंद्र बोस को उनके क्रांतिकारी विचारों के चलते देश के युवा वर्ग का व्यापक समर्थन मिला. जिसके बाद उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन किया.

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This time i won't be going as to who he was & where he was born. Instead I'll simply bring a little naustalgic vibe to all remember when in school we used to read about him how he passed the ICS exam the final interview round where he had to pass a paper through his fingers, how he encouraged the youth by saying "তুমি আমাকে রোক্ত দৌ আমি তোমাদের কে স্বাধীনতা দ্বিভূ" "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा" "Give me blood and I will give you freedom" & How the youths who were present in the very room were boosted from his statement brought a piece of paper made a cut in their body so that blood comes out so that they could write their names in that piece of paper His most popular "दिल्ली चलो" or "चलो दिल्ली" Is still used by some and the road in front of the Delhi's Red Fort is named after him. The purpose of all this is that we all have a netaji in us we just need to wake him up. He was born when the people & his country needed him now that we got freedom be forget him "no" #netaji #subhaschandrabose #bose #forgotten #hero #INA #Dilli #chalo #kadam #kadam #redfort #freedom #blood #youth #modernindia #bharatmata #India #struggle #revolutionary #PADSHAHEDEHLI #dastanedehli #d3ip

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उस समय बाजार में एक लाख रुपए का नोट आ चुका था. इस बात की जानकारी नेताजी के चालक रहे कर्नल निजामुद्दीन ने एक बार एक इंटरव्यू में दी थी. एक लाख रुपए का नोट जारी करने वाले आजाद हिंद बैंक को तब के दस देशों का समर्थन प्राप्त था. आजाद हिंद बैंक की स्थापना वर्ष 1943 में ही हो गई थी. आजाद हिंद सरकार व फौज को समर्थन देने वाले दस देशों वर्मा, क्रोसिया, जर्मनी, नानकिंग , मंचूको, इटली, थाईलैंड, फिलीपिंस व आयरलैंड ने बैंक की करेंसी को भी मान्यता दी थी. बैंक की ओर से दस रुपए के सिक्के से लेकर एक लाख रुपए के नोट तक जारी किए गए थे.

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साहस , वीरता , शौर्य , पराक्रम , खुद्दारी आदि शब्दों के समानार्थी 🦁 खून में देशभक्ति 🇮🇳 अन्याय एंव अत्याचार के खिलाफ एक मानवता का मसीहा 👬 राम जैसा धैर्य , लक्ष्मण जैसा तेज 🎯 इंसान के रूप में साक्षात् ईश्वर " नेताजी सुभाषचंद्र बोस " 👑 को जन्मदिन पर ह्रदय पूर्वक नमन ❤️🇮🇳🙏 . . . . . #happybirthday #subhaschandrabose #india #indianculture #freedom #america #guns #merica #military #2a #gun #liberty #free #peace #conservative #2ndamendment #wealth #usmc #gunsdaily #ar15 #pewpew #molonlabe #army #gunporn #igmilitia #republican #marines #constitution #navy #success

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इस बैंक ने सिर्फ एक लाख रुपए का ही नोट नहीं छापा था बल्कि दस रुपए का सिक्का भी जारी किया था. हालांकि जारी किए गए 5000 के नोट की सार्वजनिक जानकारी थी. यह पांच हजार का एक नोट बीएचयू के भारत कला भवन में भी सुरक्षित रखा है. जबकि हाल में एक लाख के नोट की तस्वीर नेताजी की प्रपौत्री राज्यश्री चौधरी ने विशाल भारत संस्थान को उपलब्ध कराया था.

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इस एक लाख रुपए के नोट पर सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर छपी थी. नेताजी के बॉडीगार्ड रहे कर्नल निजामुद्दीन ने बताया कि उनको उस समय 17 रुपए तनख्वाह मिलती थी. वहीं आजाद हिंद फौज के लेफ्टिनेंट की सैलरी 80 रुपए महीने थी. बर्मा में तैनात अफसरों को 230 रुपए तक तनख्वाह मिलती थी.

Published by Yash Sharma on 23 Jan 2019

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