महाराज माधवराव जीते थे रॉयल लाइफ, महल में है चांदी की ट्रेन और 3500 किलो का झूमर

Get Daily Updates In Email

मध्यप्रदेश के ग्वालियर राजघराने के बेटे और कांग्रेस पार्टी के सबसे अहम नेता रहे माधवराव सिंधिया भले ही आज लोगों के बीच में नहीं हों. लेकिन उनकी यादें और समाज के हित में किए गए काम आज भी उनके चाहने वालों के दिलों में हैं. 10 मार्च को जन्मे माधवराव विजयराजे सिंधिया और ग्वालियर के महाराजा जीवाजीराव सिंधिया के बेटे थे.

माधवराव सिंधिया जिस महल में रहते थे उसकी शान इतनी है कि उसे देखने लोग देश-विदेश से आते हैं. 1240771 वर्ग फीट में फैला हुआ यह खूबसूरत महल श्रीमंत माधवराव सिंधिया ने 1874 में बनवाया था. जब इस महल को बनाया गया उस वक्त इसकी कीमत करीब 1 करोड़ रुपए थी लेकिन अब इस महल की कीमत अरबों में है.

जय विलास महल की खास बात यह है कि महल में 3500 किलो का झूमर लगा हुआ है जो अपने आप में अनोखा है. झूमर को लगाने के लिए हाथियों की मदद ली गई थी. झूमर को छत पर टांगने से पहले इंजीनियरों ने छत पर 10 हाथी चढ़ाकर देखे थे कि छत वजन सह पाती है या नहीं. यह हाथी 7 दिनों तक छत की परख करते रहे, इसके बाद यहां झूमर लगाया गया था.

इतना ही नहीं इस महल के डाइनिंग हॉल में वहां डाइनिंग-टेबल पर चांदी की ट्रेन भी है. यह ट्रेन मेहमानों को खाना परोसती है. इस महल की छत पर जब आप नजर ड़ालेंगे तो आपको छत पर सोना और रत्न से की गई कारीगरी मिलेगी. इस महल में कुल 400 कमरे हैं जिसमें 40 कमरे म्यूजियम के तौर पर रखे गए हैं. इस महल की ट्रस्टी ज्योतिरादित्य की पत्नी प्रियदर्शनी राजे सिंधिया हैं.

माधवराव सिंधिया ने लोकसभा का पहला चुनाव जनसंघ से ही लड़ा था. आपातकाल के बाद हुए चुनाव में वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर गुना संसदीय सीट से चुनाव लड़े और जीत गए. बाद में माधवराव सिंधिया कांग्रेस में शामिल हो गए. माधवराव सिंधिया का कांग्रेस में जाना उनकी मां को पसंद नहीं आया. मां-बेटे के बीच बातचीत भी बंद हो गई. माधवराव सिंधिया संपत्ति के बंटवारे को लेकर भी अपनी मां से नाराज थे.

Published by Yash Sharma on 09 Mar 2019

Related Articles

Latest Articles