भगवान शिव के प्राचीन और अद्भुत मंदिर, जहां मिलती है कला और विज्ञान की बेजोड़ रचना

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भगवान शिव ब्रह्म रूप में शांत हैं, तो रुद्र रूप में रौद्र हैं. शिव हमारी प्रार्थनाएं सहजता से स्वीकार करते हैं पर शिव का मूल उद्देश्य हमें अपनी तरह सहज, सरस और सरल बनाना है. श्रावण में शिव अभिषेक कामनाओं की पूर्ति हेतु संपन्न किया जाता है. मन को चंद्रमा नियंत्रित करता है, जो सोमवार के दिन का स्वामी है. तो आइए बताते हैं भगवान शिव के आलौकिक मंदिर जहां जाकर श्रद्धालुगण उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है.

तुंगनाथ मंदिर, उत्तराखंड

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Tungnath temple has been found be the highest Shiva temple of the World and is also the highest among the five Panch Kedar temples. It is located in the Indian State of Uttarakhand in the Mountain range of Tunganath in Rudraprayag district. The word Tunganath literally means the God of Mountain. This temple is the highest shrine of Hindus dedicated to Lord Shiva and is located just below Chandrashila's peak. It is believed to be 1000 years old and in the order of Panch Krdars, it is the tritiya Kedar. The temple has a great connection with the Mahabharata heroes Pandavas!! . . #fact #facts #indiafacts #generalknowledge #gk #indianculture #indiancultureandhistory #ancientindia #history #ancient #historyofindia #wanderersofindia #storiesofindia #exploreindia #amazingindia #indiafeatures #monumentsofindia #indianmonuments #monuments #architecture #architectureindia #travel #traveldiaries #incredibleindia #architectureofindia #india #tungnath #uttrakhandtourism #shivaya #shiva

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समुद्र तल से 3680मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर है. जो बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर के बीच में स्थित है. इस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बहुत ही अद्भुत है. तीर्थयात्रियों के साथ ही सैलानियों को भी ये जगह बहुत लुभाती है. मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में बनी हुई है और आसपास कई छोटे मंदिर हैं.

जूनागढ़, भावनाथ तालेटी

 

जूनागढ़ सिर्फ गिर नेशनल पार्क के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यह साधुओं का भी घर है जो सावन महीने और महाशिवरात्रि के मौके पर दर्शन के लिए भारी तादाद में आते हैं. इनके अलावा दुनिया के अलग-अलग कोनों से भी लोग मंदिर में जल चढ़ाने और पूजा-अर्चना करने आते हैं. शिवरात्रि में तो जूनागढ़ आकर यहां के कल्चर और साधुत्व से भी रुबरू होने का मौका मिलता है.

पशुपतिनाथ मंदिर, मंदसौर

 

मध्यप्रदेश के मंदसौर में बना यह मंदिर भारत का इकलौता पशुपतिनाथ का मंदिर है. जो नेपाल के पशुपतिनाथ से काफी मिलता-जुलता हुआ है और इसलिए ही इसका नाम पशुपतिनाथ रखा गया. चिकने चमकदार पत्थर से बनी हुई पशुपतिनाथ की प्रतिमा सवा सात फीट ऊंची है. शिवना नदी के तट पर बसे इस मंदिर की मान्यता दूर-दूर तक फैली हुई है. कहते हैं सच्चे मन से मांगी गई मुराद जरूरी पूरी होती है.

मुरुदेश्वर मंदिर, कर्नाटक 

 

भगवान शिव का एक नाम मुरुदेश्वर भी है. कंडुका पहाड़ी पर बना यह मंदिर तीनों तरफ से अरब सागर से घिरा हुआ है. यहां 20 मंजिला गोपुरा बना हुआ है. 249 फुट लंबा दुनिया का सबसे बड़ा गोपुरा है. समुद्र तट के पास स्थित भगवान शिव का यह मंदिर बहुत ही खूबसूरत है और मंदिर परिसर में बने भगवान शिव की विशाल मूर्ति तकरीबन 123 फीट है.

लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर

 

भुवनेश्र्वर के सबसे बड़े मंदिरों से में एक है. जो कलिंग की वास्तुकला और मध्यकालीन ऐतिहासिक परंपरा का बेजोड़ नमूना है. लिंगराज मंदिर से होकर एक नदी गुजरती है जो कई तरह की शारीरिक बीमारियों को दूर करता है. सावन महीने में सुबह से ही भक्तगण महानदी से पानी भरकर पैदल चलकर मंदिर तक आते हैं.

Published by Yash Sharma on 10 Aug 2019

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