नोबल पुरूस्कार विजेता मदर टेरेसा शांति और प्रेम के सन्देश के लिए हुईं दुनिया भर में मशहूर

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अपने पूरे जीवन को असहायों और जरूरतमंद लोगों के लिए समर्पित करने वाली मदर टेरेसा की हाल ही में 109 वीं जयंती बीती है. दिन-रात पीड़ितों और गरीबों की सेवा करने वाली मदर टेरेसा को आज इस मौके पर पूरी दुनिया ने याद किया. मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को मेसिडोनिया के स्कोप्जे शहर में हुआ था. उनके विचारों ने समाज में शांति और प्रेम बनाए रखने का काम किया.

इसी वजह से उन्हें साल 1979 में शांति और सदभावना के क्षेत्र में अहम योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. कल उनके जयंती पर कोलकाता में ‘मदर हाउस’ में विशेष प्रार्थना आयोजित की गई. इस प्रार्थना का आयोजन मिशनरीज ऑफ चैरिटी की सिस्‍टर्स की ओर से किया गया.

मदर टेरेसा कैथोलिक थीं, लेकिन उन्हें भारत की नागरिकता मिली हुई थी. उन्हें भारत के साथ-साथ कई अन्य देशों की नागरिकता मिली हुई थी, जिसमें ऑटोमन, सर्बिया, बुल्गेरिया और युगोस्लाविया शामिल हैं. साल 1946 में उन्होंने गरीबों, असहायों की सेवा का संकल्प लिया था. निस्वार्थ सेवा के लिए टेरेसा ने 1950 में कोलकाता में ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ की स्थापना की थी. 1981 में उन्होंने अपना नाम बदल लिया था. अल्बानिया मूल की मदर टेरेसा ने कोलकाता में गरीबों और पीड़ित लोगों के लिए जो किया वो दुनिया में अभूतपूर्व माना जाता है.

मदर टेरेसा ने 12 सदस्यों के साथ अपनी संस्था की शुरुआत की थी और अब यह संस्था 133 देशों में काम कर रही है. 133 देशों में इनकी 4501 सिस्टर्स हैं. वेटिकन सिटी में एक समारोह के दौरान रोमन कैथोलिक चर्च के पोप फ्रांसिस ने मदर टेरेसा को संत की उपाधि दी. दुनियाभर से आए लाखों लोग इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बने थे. मदर टेरेसा ने अपना पूरा जीवन गरीब और असहाय लोगों की भलाई के लिए समर्पित कर दिया था. वह सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेश में भी अपने मानवता के कार्यों के लिए जानी जाती हैं.

मदर टेरेसा अपनी मृत्यु तक कोलकाता में ही रहीं और आज भी उनकी संस्था गरीबों के लिए काम कर रही है. उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के साथ भारत रत्न, टेम्पटन प्राइज, ऑर्डर ऑफ मेरिट और पद्म श्री से भी नवाजा गया है. उनका कहना था, ‘जख्म भरने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होंठ से कहीं ज्यादा पवित्र हैं.’

Published by Yash Sharma on 28 Aug 2019

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