इन महिलाओं का पूरा जीवन ही देता है प्रेरणा, हर परिस्थिति में बिना हिम्मत हारे पाया मुकाम

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जिंदगी में कभी भी किसी भी परिस्थिति में हमेशा हिम्मत के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा हमें देश की कई सफल महिलाएं देती हैं. जिनकी मेहनत और सकारात्मक सोच ने आज उन्हें सफल बनाने के साथ ही दूसरों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनाया है तो चलिए आपको बताते हैं कौन हैं ये महिलाएं –

1. मैरी कॉम –

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कई बार देश का नाम रोशन कर चुकी महिला बॉक्सर एक मात्र ऐसी भारतीय महिला बॉक्सर हैं जिन्होंने साल 2012 में हुए ओलम्पिक में क्वालीफाई किया था. साथ ही देश को कांस्य पदक दिलाया था. यह पहली बार था जब किसी महिला ने यहां पहुंचकर देश का नाम रोशन किया था. इसके साथ ही वह 5 बार विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप की विजेता भी रह चुकी हैं. यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने खूब मेहनत की है. उन्होंने अपना लक्ष्य निर्धारित किया और बस इसके लिए आगे बढ़ती रहीं. वह क्विक लर्नर हैं. किसी भी चीज को वह बहुत जल्दी सिख लेती हैं. उन्होंने एशियन महिला मुक्केबाज़ी, एशियन इंडोर गेम्स के साथ ही कई खिताब अपने नाम किए हैं.

2. भक्ति शर्मा –

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भक्ति शर्मा भारतीय तैराक हैं. जिन्होंने अंटार्कटिका महासागर में सिर्फ 52 मिनट में 1.4 मील तैरकर विश्व रिकॉर्ड बनाया है. जिस समय भक्ति ने तैराकी की थी. उस समय वहां का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस था. इसे कम्पलीट करने के बाद वह विश्व की सबसे युवा तैराक बन गईं. बता दें भक्ति ने विश्व के 5 महासागरों में तैरने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है. इसके साथ ही वह साल 2010 में तेनज़िंग नार्वे पुरस्कार से भी सम्मानित की जा चुकी हैं.

3. हर्षिणी कान्हेकर –

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हर्षिणी भारत की पहली महिला फायर फाइटर हैं. उनके बारे में यह कहा जाता है कि वह एक बार वह अपने पिता के साथ संस्थान में फॉर्म भरने गई थीं लेकिन वहां बैठे लोगों ने उनका फॉर्म अलग रख दिया था. यह सब देखकर हर्षिणी ने तय किया कि वह यहीं नौकरी करेंगी. यह पहली बार था जब साल 1956 के बाद नेशनल फायर सर्विस कॉलेज में किसी महिला का एडमिशन हुआ था. सभी यह चाहते थे कि हर्षिणी कॉलेज छोड़कर चली जाएं लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं होने दिया. उन्होंने अपना कोर्स पूरा किया और उसी के बाद कॉलेज से बाहर आईं.

4. साइना नेहवाल –

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दुनिया भर में शीर्ष प्राप्त करने वाली साइना पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनी हैं. लंदन ओलंपिक 2012 में साइना ने इतिहास रचते हुए बैडमिंटन की एकल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था. साइना की मां ने उनके जन्म से पहले ही उनका नाम स्टेफी सोच लिया था. साइना का यह मानना है कि उन्हें आगे बढ़ने की इच्छा शक्ति मां की वजह से ही आई थी.

5. हिमा दास –

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हिमा ने महज 18 साल की उम्र में आई ए एफ अंडर 20 में एथलेटिक्स में महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में शीर्ष स्थान प्राप्त करने के साथ ही देश को स्वर्ण पदक भी दिलाया. इस मानक पर स्वर्ण पदक जीतने वाली हिमा भारत की एक मात्र महिला खिलाड़ी हैं. हिमा ने बहुत कम समय से यह उपलब्धि हासिल की है.

6. तानिया सचदेव –

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तानिया शतरंज खिलाड़ी हैं और उन्होंने इस क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय मास्टर, आई ऍम और महिला ग्रैंड मास्टर डब्लू जी ऍम के ऍफ़ आई डी ए जैसे कई खिताब अपने नाम किए हैं. तान्या ने 6 साल की उम्र में ही शतरंज खेलना शुरू कर दिया था. उन्होंने साल 2002 में एशियाई जूनियर गर्ल्स चैंपियनशिप जीतने के साथ ही देश का नाम ऊंचा किया.

7. विद्या बालन –

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बॉलीवुड की सफल एक्ट्रेस विद्या बालन एक राष्ट्रीय पुरस्कार और 5 बार फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजी जा चुकी हैं. एक्टिंग के साथ ही विद्या भरत नाट्यम और कथक नृत्य में ट्रेन्ड हैं. विद्या अपने करियर की शुरुआत मलयालम फ़िल्म से करने वाली थीं लेकिन इस फ़िल्म की शूटिंग शुरू न हो सकी और निर्देशक ने इसकी वजह विद्या को बताया और उन्हें अपशगुन तक कह दिया. लेकिन आज वह बॉलीवुड की सक्सेसफूल एक्ट्रेस हैं.

8. रश्मि बंसल –

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रश्मि प्रख्यात खगोल भौतिकी वैज्ञानिक की बेटी हैं. इसी वजह से उनका सारा बचपन टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फ़ण्डामेंटल रिसर्च में ही बीता है. उन्होंने अपने कॉलेज के समय में किताब लिखना शुरू कर दिया था. साथ ही जब उन्होंने एम बी ए की पढ़ाई पूरी की तो उन्होंने अपना प्रकाशन समूह जे ए ऍम भी खोल लिया. अपनी कहानियों के लिए रश्मि बहु आयामी कथानकों की खोज में रहती हैं. उनकी चर्चित किताबों में फॉलो एव्री रेनबो व अराइज़ अवेक शामिल हैं.

Published by Chanchala Verma on 23 Oct 2019

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