गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए विदेश मंत्रालय की नौकरी छोड़ गांव में खोला राजेश कुमार ने संस्थान

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किसी भी व्यक्ति के लिए शिक्षा पैसों से भी कहीं ज्यादा जरुरी होती है. शिक्षा आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है. शिक्षा ही आपको आपकी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को पूरा करने के साथ ही सही तरीके से जीवन जीना भी सिखाती है. यहाँ हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपनी विदेश मंत्रालय की नौकरी छोडकर बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया. हम बात कर रहे हैं समस्तीपुर जिले के रहने वाले राजेश कुमार सुमन की.

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राजेश कुमार सुमन ने समस्तीपुर महाविद्यालय समस्तीपुर से इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की है. सुमन को शुरू से ही गरीब बच्चों को पढ़ाने में रूचि थी. विदेश मंत्रालय में नौकरी मिलने के बाद भी वे खुश नहीं थे. वे गरीब छात्रों के लिए कुछ करना चाहते थे. इसीलिए उन्होंने जॉब छोडकर छात्रों को शिक्षा प्रदान करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाने की ठानी जिसके चलते उन्होंने समस्तीपुर जिले के रोसड़ा स्थित ‘बीएसएस क्लब: नि:शुल्क शैक्षणिक संस्थान’ की स्थापना की. समस्तीपुर बिहार का एक पिछड़ा हुआ इलाका है. जहां छात्रों को सही मार्गदर्शन नहीं मिल रहा था जिस वजह से होनहार छात्र भी आगे नहीं बढ़ पाते और जीवन यापन के लिए जरुरी आवश्यकताओं को पूरा करने की कोशिश में लग जाते हैं.

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इसी वजह से सुमन ने समस्तीपुर में एक ऐसा इंस्टीट्यूट खोला जहां वे छात्रों को विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए तैयार कर सके और उनका भविष्य संवार सकें. साल 2008 में उन्होंने अपने संस्थान की शुरुआत की थी. उन्हें अपने परिवार का भी पूरा सपोर्ट मिला. शुरूआत में सुमन के पास सिर्फ 4 ही स्टूडेंट आए थे. लेकिन धीरे-धीरे उनके इंस्टीट्यूट में दूर-दूर से पढ़ने के लिए स्टूडेंट्स आने लगे. आज सुमन की कोचिंग में 300 बच्चे विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए मुफ्त कोचिंग ले रहे हैं. यहां से ट्रेनिंग लिए छात्र विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल भी हो रहे हैं. सुमन बताते हैं कि बिहार में काफी लोग फौज में हैं और देश की सेवा में लगे हुए हैं ऐसे में हम अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए शहीदों के बच्चों को मुफ्त में कोचिंग देते हैं साथ ही विधवाओं, गरीबों, किसानों और विकलांग के बच्चों को मुफ्त में कोचिंग दी जाती है.

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बताते चलें कि सुमन को जब भी समय मिलता है वे ग्रामीण इलाकों में जाकर शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए भी काम करते हैं. वे वहां के छात्रों को गाइड करते हैं और शिक्षा संबंधी उनकी हर समस्या को हल करते हैं. कई सालों से इस काम में जुटे सुमन का समस्तीपुर में काफी नाम है और दूर-दूर से लोग उनसे सलाह लेने आते हैं. सुमन मानते हैं कि लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना ही अब उनकी जिंदगी का लक्ष्य है. आपको यह भी बता दें कि इन सब कार्यों के लिए सुमन को अनुदान भी नहीं मिलता ना ही वे अनुदान के लिए किसी से कहते हैं. सुबह-सुबह ही सुमन लोगों की मदद के लिए निकल जाते हैं और फिर देर रात तक घर लौटते हैं और छुट्टी वाले दिन वे ग्रामीण इलाकों में निकल जाते हैं और वहां के लोगों की मदद करते हैं.

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सुमन मानते हैं कि, “शिक्षा ही हर समस्या का समाधान है. भारत को अगर सुपरपावर बनना है तो यहां के गांव-गांव में शिक्षा का प्रचार प्रसार हमें करना होगा. यह काम केवल सरकार का नहीं होना चाहिए हर व्यक्ति को शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए आगे आना चाहिए और अगर हम भारत में शिक्षा को तेजी से गांव-गांव तक पहुंचा पाते हैं तो बहुत जल्द ही भारत दुनिया के अग्रणी मुल्कों में शामिल हो जाएगा.”

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Published by Chanchala Verma on 12 Apr 2018

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