ब्लड कैंसर के इलाज के लिए हॉस्पिटल के आईसीयू में बना ढाई साल के बच्चे का आधार कार्ड

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पिछले कुछ समय से हमें हर सहकारी और गैर-सहकारी जगहों पर एक पोस्टर या दीवारों पर यह लिखा हुआ तो मिल ही जाता है कि, “आधार अनिवार्य है.” यह ऐसा है क्योंकि सरकार का कहना है कि अब किसी भी कार्य के लिए या आपकी आइडेंटिटी को बताने के लिए आधार कार्ड जरुरी है. हम कई बार ऐसी बातों को अनसुना भी कर देते हैं, लेकिन आज हमारे सामने जो मामला आया है उसे देखने के बाद आप भी शायद आधार कार्ड को जरुरी डॉक्यूमेंट में शामिल करने से पीछे नहीं हटेंगे.

दरअसल हाल ही में एक अख़बार दैनिक भास्कर में एक ऐसी खबर प्रकाशित हुई जिसने सभी अपनी तरफ आकर्षित किया. खबर के अनुसार मामला छत्तीसगढ़ के कोरबा के कोरबी गांव का है जहाँ के रामकृष्ण हॉस्पिटल के आईसीयू में एक मामला पहुंचा था. यहाँ आईसीयू वार्ड में एक ढाई साल के बच्चे हिमांशू को एडमिट किया गया. बच्चे को ब्लड कैंसर बताया गया है.

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बच्चे के इलाज के लिए हॉस्पिटल से 2 से 3 लाख का खर्चा बताया गया था लेकिन हिमांशू के पिता नारायण प्रसाद कैशिक किसान हैं और वे इतने पैसे का इंतजाम नहीं कर पा रहे थे. आखिरकार अपने बेटे के सही इलाज के लिए पिता नारायण प्रसाद ने अस्पताल प्रबंधन से भी गुहार लगाई.

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प्रबंधन से यह बात पता चली कि उन्हें इलाज के लिए संजीविनी कोष से पैसा मिल सकता है लेकिन इसके लिए उनके पास बच्चे का आधार कार्ड होना जरुरी था. मामला यहाँ जाकर अटक गया था क्योंकि अब तक बच्चे का आधार कार्ड भी नहीं बना था. खबर के अनुसार पिता नारायण प्रसाद बच्चे का आधार कार्ड बनवाने के लिए दिल्ली में काफी जगहों पर गए, इसके बाद वे कचहरी चौक के एक च्वाइस सेंटर पहुंचे जहाँ उन्हें आशीष पांडेय मिले. इस दिन छुट्टी थी लेकिन इसके बाद भी पिता की परेशानी को समझते हुए सेंटर से आधार बनाने का पूरा सेटअप लेकर आशीष आईसीयू पहुंचे और बच्चे का आधार जनरेट कर दिया. बताया जा रहा है कि अब बच्चे को आधार कार्ड के जरिए मदद मिल जाएगी.

Published by Hitesh Songara on 16 Apr 2018

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