दिल्ली AIIMS से गिरफ्तार हुआ फर्जी डॉक्टर, पहचान छुपाकर 5 महीने से कर रहा था काम

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अब तक आपने कई स्टूडेंट्स को फर्जी तरीके से मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम देने के बारे में तो सुना ही होगा. इसके साथ ही कई ऐसे डॉक्टर्स के बारे में भी पता चलता है जोकि फर्जी तरीके से डिग्री लेकर मरीजों का ईलाज कर रहे हैं. यहां हम आपको एक ऐसे ही फर्जी डॉक्टर के बारे में बताने जा रहे हैं जोकि नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 5 महीने से काम कर रहा है.

इस फर्जी युवक का नाम है अदनान खुर्रम जोकि 5 महीने से एम्स में अपनी असली पहचान छुपाकर काम कर रहा था. अदनान ने मेडिकल साइंस के छात्रों और उनसे संबंधित विभागों में अपनी दोस्ती-यारी भी काफी बढ़ा रखी थी. यही नहीं उसने खुद को डॉक्टर बताकर मेडिकल कार्यक्रमों और सेमिनारों में भी हिस्सा लेना शुरू कर दिया था. इस शख्स को शनिवार के दिन पुलिस ने गिरफ्तार किया.

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पुलिस द्वारा की गई जांच में जब अदनान की दवाइयों, एम्स के डॉक्टरों और वहां के विभागाध्यक्षों की जानकारी के बारे में पता लगा तो वह भी हैरान रह गई. आरोपी की पहचान मूलरूप से अदनान खुर्रम के रूप में हुई है जोकि बिहार का रहने वाला है. वह फिलहाल दिल्ली में जामिया नगर के पास बाटला हाउस में रहता है. अदनान की उम्र 19 साल है. उनके बारे में बात करते हुए एम्स रेसिडेंट डॉक्टर्स ने बताया कि आरोपी के पास डॉक्टरों को जारी की जाने वाली एक खास डायरी भी थी. चूंकि खुर्रम पूछताछ में बार-बार अपने बयान बदल रहा है, लिहाजा अभी तक मामले के पीछे की सच्चाई सामने नहीं आ सकी है.

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आरोपी से जब इसके बारे में बात की गई तो जवाब देते हुए उनके अपने इस गलत काम की वजह परिवार की मदद करना बताया. उसका कहना था कि वह ऐसा कर उस परिवार के बीमार शख्स का जल्द से जल्द इलाज कराना चाहता था. वहीं, अन्य कारण में उसने दावा किया कि उसे डॉक्टरों के साथ वक्त बिताना अच्छा लगाता है, लिहाजा उसने ऐसा किया.

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इस मामले में डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (दक्षिण) रोमिल बनिया ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 419 और 468 के तहत उस पर हौज खास पुलिस थाने में मामला दर्ज हुआ है. इसके साथ आरडीए अध्यक्ष हरजीत सिंह ने कहा कि खुर्रम उनकी गतिविधियों पर कुछ महीनों से लगातार नजर बनाए हुए थे. उनके अनुसार, वह हर वक्त लैब कोट पहनकर और स्टेथोस्कोप लेकर घूमता था. वह विभिन्न डॉक्टरों से अलग-अलग दावे करता था. एम्स में तकरीबन 2000 रेजिडेंस डॉक्टर हैं, लिहाजा उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर एक-दूसरे को पहचानना बेहद कठिन है. खुर्रम ने बस इसी बात का फायदा उठाया.

Published by Chanchala Verma on 16 Apr 2018

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