श्रीमद्भागवत गीता के 10 विचार जो बदल देगें आपके जिंदगी जीने का नजरिया

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श्रीमद्भागवत गीता हमारे प्राचीन आध्यात्म को दर्शाता है. माना जाता है कि श्रीमद्भागवत गीता हमारे हिन्दू धर्म का आधार है. ‘भगवद’ का अर्थ है ‘भगवान’ और ‘गीता’ का अर्थ है ‘गीत’ अर्थात श्रीमद्भागवत गीता का अर्थ है ‘भगवान के द्वारा गाया हुआ गीत.’ हम हमारे पूर्वजों से अकसर गीता के विचार सुनते आए हैं. इसमें लिखा हर वचन बहुत ही अनमोल है और कहा जाता है कि अगर कोई इंसान इन विचारों को पूरी तरह अपनी ज़िंदगी में उतार ले तो इंसान को कभी दुःख या चिंता का सामना नहीं करना पड़ता. वो व्यक्ति हमेशा खुश रहता है.

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यह एक महान ग्रन्थ है जिसमें भगवान के होने का सबूत है, इसमें जो छुपा ज्ञान है उसे कोई भी झुठला नहीं सकता है. श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार कहा जाता है. गीता का वचन पाठ श्री कृष्ण ने किया है जब वो धर्म की स्थापना हेतु अर्जुन को उनका कर्म ज्ञात करवा रहे थे. चलिए उन्हीं वचनों में से कुछ अनमोल विचार हम आपको बताते हैं :-

1. जो मन में हमेशा शंका रखतें हैं उन्हें ना ही संसार में और ना ही कहीं भी चैन मिलता है.

2. जो अपनी सोच को नियंत्रित नहीं रख पाते, उन्हीं की सोच उनकी दुश्मन बन जाती है.

3. मनुष्य अपने विचार से बनता है जैसा वो सोचता है वही वो होता है.

4. भगवान की शक्ति आपके पास हमेशा मानसिक कार्यों, अहसास, श्वास के रूप में है. जिसका उपयोग आप हमेशा करते हैं.

5. व्यक्ति जो चाहे वो बन सकता है, अगर वो अपने लक्ष्य पर पूरे विश्वास के साथ काम कर रहा है तो.

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6. जो वास्तविक नहीं है उससे मत डरो, वो ना कभी था और न ही वो कभी होगा. और जो वास्तविक है वो हमेशा था और उसे कोई नष्ट नहीं कर सकता.

7. अशांत मन को शांत करना मुश्किल है, लेकिन बार-बार कोशिश करने पर यह किया जा सकता है.

8. जो खुद पर विश्वास करते हैं वो किसी भी चीज़ के लिए भगवान के अलावा किसी पर आश्रित नहीं होते हैं.

9. हमेशा कर्म करो क्योंकि बेकार रहने से कई ज्यादा कर्मवान होना है.

10. लालच, गुस्सा और वासना तीनों नरक के द्वार हैं.

Published by admin on 23 Apr 2018

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