आज के दिन मिला था कवियित्री महादेवी वर्मा को ज्ञानपीठ पुरस्कार, गूगल ने डूडल बनाकर किया सम्मान

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महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की प्रख्यात कवियित्री हैं. उनका नाम हिंदी साहित्य के छायावादी युग के 4 प्रमुख स्तंभ सुमित्रानन्दन पन्त, जयशंकर प्रसाद और सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला के साथ लिया जाता है. उनका जन्म 26 मार्च, 1907 को फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था. महादेवी वर्मा को ‘आधुनिक काल की मीराबाई’ कहा जाता है. आज के दिन साल 1982 में महादेवी वर्मा को ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया था उसी की याद में आज गूगल पर डूडल बनाकर उन्हें सम्मान दिया जा रहा है.

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महादेवी वर्मा ने पंचतंत्र और संस्कृत का भी अध्ययन किया है. महादेवी वर्मा को अपनी काव्य प्रतियोगिता में ‘चांदी का कटोरा’ मिला था जोकि उन्हें गांधीजी को दे दिया था. महादेवी वर्मा सत्याग्रह आंदोलन के दौरान कवि सम्मेलन में अपनी कविताएं सुनातीं थी जिसके लिए उन्हें हमेशा प्रथम पुरस्कार मिलता था. वे मराठी मिश्रित हिन्दी बोलती थी. उनकी शुरुआती शिक्षा इंदौर में हुई थी. इसके बाद उन्होंने बी.ए. जबलपुर से किया था. साल 1932 में उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की थी. इस दौरान उनके दो काव्य संकलन ‘नीहार’ और ‘रश्मि’ प्रकाशित हो चुके थे और काफी चर्चा में भी आ चुके थे. 7 साल की उम्र से ही वे काव्य की और मुखर हो गईं थीं. अपने विद्यार्थी जीवन में ही उन्होंने कई कविताऐं लिखी थी जोकि देश की प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं में छपने भी लगी थी.

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महादेवी वर्मा का विवाह काफी छोटी उम्र में ही हो गया था लेकिन उन्हें सांसारिक जीवन से लगाव नहीं था. वे बौद्ध भिक्षुणी बनना चाहती थीं क्योंकि वे बौद्ध धर्म से काफी प्रभावित थीं. उन्होंने विवाह के बाद भी शिक्षा जारी रखी. उनकी शादी महज 9 साल की उम्र में ‘डॉ. स्वरूप नरेन वर्मा’ के साथ इंदौर में हुई थी.

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उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है. साल 1934 में ‘सेकसरिया पुरस्कार’, साल 1942 में ‘द्विवेदी पदक’, साल 1943 में ‘मंगला प्रसाद पुरस्कार’, साल 1943 में ‘भारत भारती पुरस्कार’, साल 1956 में ‘पद्म भूषण’, साल 1979 में ‘साहित्य अकादमी फेलोशिप’, साल 1982 में ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ और साल 1988 में कवियित्री को ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था.

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11 सितंबर, 1987 को प्रयाग में महादेवी वर्मा का निधन हुआ था. राष्ट्र भाषा हिन्दी के संबंध में उनका कथन है, ‘हिन्दी भाषा के साथ हमारी अस्मिता जुड़ी हुई है. हमारे देश की संस्कृति और हमारी राष्ट्रीय एकता की हिन्दी भाषा संवाहिका है.’

Published by Chanchala Verma on 27 Apr 2018

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