दो बहनों कनिका और कोशिका ने अपने गांव के विकास के लिए छोड़ी लाखों की नौकरी

Get Daily Updates In Email

आज के अधिकतर हर युवा की इच्छा होती है कि वो किसी बड़े शहर में जाकर अच्छा खासा पैसा कमा कर अपनी जिंदगी ऐशो-आराम से जिए. माता-पिता भी बच्चों के करियर की परवाह करते हुए, उन्हें छोटे गांव या शहर से बाहर बड़े शहर पढ़ने भेज देते हैं और बच्चे वापस अपने गांव आना पसंद नहीं करते हैं उन्हें अपने गांव में कमियां दिखने लगती हैं. बच्चे शहर में ही बस जाते हैं और गांव में अब बस बुजुर्ग ही रह गए हैं. यह किसी एक गांव या शहर की कहानी नहीं हैं बल्कि हर गांव में ऐसा हो रहा है. लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो पढ़-लिख जाने के बाद अपने गांव वापस आकर उसके विकास में योगदान देते हैं. इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी ही दो बेटियों के बारें में बताएंगे जिन्होंने आईटी की जॉब छोड़ कर अपने गांव के विकास में योगदान देने के लिए वापिस आ गईं.

courtesy 

उत्तराखंड की कुशिका और कनिका शर्मा ने दिल्ली जैसे महानगर की सुख सुविधाएं छोड़कर गांव के पहाड़ों को एक नया जीवन देने के लिए गांव आना सही समझा. एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार पता चला है कि एक दशक में पहाड़ी राज्य से 5 लाख से ज्यादा लोग कहीं और जा कर बस गए हैं कारण है वहां ना कोई रोजी रोटी का साधन है ना शिक्षा और ना ही चिकित्सा. वहां बस टूरिस्ट बिज़नेस ही है. आए दिन उत्तराखंड में कई प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं जिस कारण यहां से लाखो लोग जा चुके हैं. कुशिका और कनिका ने गांव वापस आ कर गांव वालों को आर्गेनिक खेती के लिए जागरूक किया और इसी के चलते वहां के मुख्यमंत्री ने इन्हे पुरस्कार देकर सम्मानित किया. इसी सम्मान से अपने आप तरक्की के पैमाने बदल जाते हैं और हर युवा को विकास करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं.

courtesy 

कुशिका ने एमबीए किया और फिर मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पैकेज पर जॉब करने लगी और वहीं कनिका शर्मा ने दिल्ली से उच्च शिक्षा प्राप्त कर इंटरनेशनल एनजीओ से जुड़ गई लेकिन दोनों बहनो को वहां घर-गांव की खूबसूरती, माता-पिता से दूर रहना दोनों को अच्छा नहीं लग रहा था.  कुशिका बताती हैं शहरों में लोग अपने जीवन में आरामदायक कुछ पल बिताने के लिए प्रकृति का सहारा लेते हैं तो हमने सोचा क्यों ना गांव चल कर सब के लिए कुछ इसी तरह का पहाड़ पर इंतेज़ाम किया जाएं और दोनों बहनों ने गांव आने का फैसला लिया. आगे वो बोलती हैं पहाड़ पर जो लोग छुट्टियां मनाने आते हैं उन्हें मेरे संसाधन तसल्ली तो देंगे ही और मेरा कारोबार भी चल पड़ेगा.

courtesy 

दोनों बहनें दक्षिण भारत के कई राज्यों में ऑर्गेनिक खेती करना सीख आई थीं. शुरुआत में दोनों को काफी दिक्क्तों का सामना करना पड़ा लेकिन धीरे धीरे सब अच्छा चलने लगा. दोनों ने गांव के बच्चों को पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया. टूरिस्ट भी आने लगे थे. गांव के लोगों को हॉस्पिटैलिटी की जानकारी दी.  दोनों की कई तरकीबें टूरिस्ट को बहुत लुभा रही हैं इन्होने टूरिस्टस के लिए एक खास व्यवस्था कर रखी है कि टूरिस्ट खुद खेत में जाकर अपनी मन पसंद सब्जी तोड़ कर ला सकते हैं. टूरिस्ट रिसोर्ट में एक शेफ भी है जो टूरिस्ट की इच्छा के हिसाब से खाना बनायेगा. यह रिसोर्ट बेहद खूबसूरत है. इस रिसोर्ट में अभी दो दर्जन कर्मचारी हैं. इन्होने कृषि उत्पादों को बेचने के लिए सप्लाई चैन भी बनाई और अब इनके कृषि उत्पाद मंडियों तक जाते हैं.

courtesy 

आज कनिका कुशिका ना केवल खुद अपने काम से खुश हैं बल्कि गांव, सरकार और आसपास के गांव के लोग भी खुश हैं. यह लोगों को रोजगार दे रही हैं जिससे अब लोगों को दूसरे शहर जाने की जरूरत नहीं है.

अब समय आ गया है जब युवा को शहर की चकाचौंध में खोने के बजाये अपने गांव के विकास के लिए कुछ करना चाहिए.

Published by admin on 10 May 2018

Related Articles

Latest Articles