बीजेपी की सरकार गिरी, फ्लोर टेस्ट से पहले ही येदियुरप्पा ने विधानसभा में दिया इस्तीफा

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कर्नाटक में विधानसभा चुनाव-2018 के नतीजे आने के बाद से ही बीजेपी और कांग्रेस के बीच बहुमत साबित करने की होड़ लगी हुई देखी गई. इस बीच फ्लोर टेस्ट हुआ जहाँ बीजेपी की सरकार गिर गई है. इसके साथ ही यह भी बता दें कि विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से पहले ही मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने इमोशनल होकर भाषण भी दिया और इस्तीफा भी दे दिया. इसके साथ ही कांग्रेस और जेडीएस में जश्न भी शुरू हो गया है. बताया जा रहा है कि अब जेडीएस के कुमारस्वामी कांग्रेस के समर्थन से मुख्यमंत्री बनेंगे.

अपने भाषण में येदियुरप्पा ने यह भी कहा कि, “उनकी पार्टी 40 से 104 पर पहुंची हैं. अगर अगले पांच साल के बीच में चुनाव होते हैं तो बीजेपी 150 सीटों के साथ वापसी करेगी.”

हालांकि बीजेपी को इलेक्शन के दौरान सबसे 104  सीटें मिली लेकिन इसके बावजूद भी वह बहुमत स्थापित करने से 8 सीट दूर रही. तो वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के द्वारा जेडीएस को समर्थन देकर बहुमत स्थापित करने की कोशिश देखने को मिली. कर्नाटक चुनाव के दौरान कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं. चलिए हम आपको बताते हैं इस चुनाव का शुरू से लेकर अब तक का पूरा सफ़र:

1. कर्नाटक में 224 सदस्यीय विधानसभा की 222 सीटों पर 12 मई को 72.13 फीसदी मतदान हुआ था. 2 सीटों आर.आर नगर सीट और जयनगर सीट पर मतदान नहीं हुआ. आर.आर नगर में चुनावी गड़बड़ी और जयनगर सीट पर बीजेपी उम्मीदवार के निधन के कारण मतदान को टाला गया था.

2. 15 मई को सुबह के साथ ही वोट्स की गिनती शुरू की गई, जिस दौरान शुरुआत के साथ ही भारतीय जनता पार्टी पूर्ण को बहुमत के साथ सरकार बनाने की तरफ अग्रसर देखा गया.

3. 222 सीटों में से 104 सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में आई तो वहीँ कांग्रेस को 78, जेडीएस को 38 और अन्य को 2 सीटें प्राप्त हुई थीं.

4. भारतीय जनता पार्टी ने सबसे बड़ी पार्टी होने के चलते बहुमत स्थापित किए जाने का दावा पेश किया और इसी दौरान कांग्रेस ने जेडीएस की तरफ गठबंधन के लिए हाथ बढ़ाया गया.

5.  राज्यपाल वजूभाई वाला ने कहा कि वे सभी नतीजे आने का इंतजार करेंगे और इससे पहले किसी भी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता नहीं देंगे. (राज्यपाल वजूभाई वाला के बारे में बता दें कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य हैं. इसके अलावा वे 2012 से 2014 तक गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे हैं.)

6. इसके बाद 17 मई को राजभवन में बीएस येदियुरप्पा को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ राज्यपाल वजूभाई वाला ने दिलाई. इसके साथ ही येदियुरप्पा कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री बने. जिसके पहले सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक चुनाव को लेकर रातभर मामला चलता रहा जहाँ कांग्रेस-जेडीएस की अर्जी पर सुनवाई की गई थी और येदियुरप्पा की शपथ पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था.

7. वहीँ बोपैय्या के प्रोटेम स्पीकर बनने के चलते बीजेपी के पास 103 विधायक रहे और हाउस 221 का हो गया. मतलब बहुमत स्थापित करने के लिए बीजेपी को 111 विधायकों की जरूरत थी और पार्टी का कहना था कि वे आसानी से बहुमत स्थापित कर लेंगे.

8. राज्यपाल के द्वारा येदियुरप्पा को महज 15 दिनों के भीतर बहुमत परीक्षण के लिए कहा गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस समय को 48 घंटे कर दिया गया था.

9. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद येदियुरप्पा को 19 मई की शाम 4 बजे कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बहुमत साबित करना था.

10. बीजेपी अपना बहुमत साबित नहीं कर पाई और येदियुरप्पा ने विधानसभा में इमोशनल होकर इस्तीफा दे दिया.

क्या होता है फ्लोर टेस्ट ?

:- फ्लोर टेस्ट को बहुमत साबित करने की प्रक्रिया कहा जाता है, जिसके अंतर्गत स्पीकर या प्रोटेम स्पीकर के समक्ष विधयक अपनी पार्टी के लिए वोट करते हैं. इस प्रक्रिया को पूर्णरूप से पारदर्शी रखा जाता है. इस दौरान यदि एक से अधिक दलों के द्वारा बहुमत स्पस्ट ना होते हुए सरकार स्थापित करने का दावा पेश किया जाता है राज्यपाल किसी एक दल को बहुमत साबित करने के लिए कहता है. तब सदन में एक बैठक की जाती है जहाँ सभी विधायक बहुमत चुनाव के लिए पहुँचते हैं. यदि इस चुनाव में कोई विधायक नहीं भी आना चाहे तो वह ऐसा कर सकता है. लेकिन विह्प जारी होने पर उसका आना अनिवार्य होता है वरना उसपर कार्रवाई की जा सकती है. इस दौरान दोनों पार्टियों को समान मत मिलने पर राज्यपाल अपने पसंदीदा दल को वोट कर उसकी सरकार बनवा सकता है.

पहले भी हुआ है ऐसा:

मालूम हो कि वर्ष 2004 में जेडीएस और कांग्रेस के गठबंधन की सरकार बनी थी और इस दौरान कांग्रेस के धरम सिंह को सीएम बनाया गया था. लेकिन वर्ष 2006 में यह गठबंधन टूट गया और जेडीएस ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया था. इसके बाद समझौते के अंतर्गत कुमारस्वामी को जनवरी 2006 में सीएम बनाया गया था लेकिन अगले ही साल कुमारस्वामी ने बीजेपी से किनारा कर लिया और अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया. जिसके बाद यहाँ राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था.

बहुमत किसी का और सरकार किसी की:

  • गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान 40 सीटों में से बीजेपी को 13, कांग्रेस को 17 सीटें मिली थी और बहुमत के लिए 21 सीटों की जरूरत थी. लेकिन यहाँ बीजेपी ने एमजीपी और अन्य दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई थी.
  • बात करें मणिपुर विधानसभा चुनाव की तो यहाँ 60 सीटों के लिए चुनाव हुआ था. जिसमें से बीजेपी को 21, कांग्रेस को 28 सीटें मिली थीं. बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत के चलते बीजेपी ने एनपीपी और अन्य दलों से हाथ मिलाया था और सरकार बनाई थी.
  • वहीँ मेघालय में 60 सीटों में से बीजेपी को 2 और कांग्रेस को 21 सीटें मिली थी. लेकिन 2 सीटें होने के बाद भी एनपीपी के नेतृत्व में बीजेपी ने 6 दलों के साथ मिलकर अपनी सरकार बनाई थी.

Published by Hitesh Songara on 19 May 2018

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