शिवराज मामा से छात्र का सवाल- ‘मामा मुझे 80 परसेंट पर भी क्यों नहीं मिला लैपटॉप?’

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वैसे तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हमेशा से राज्य की जनता के समक्ष कई तरह की बातें करते हुए देखा जा चुका है. लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि वे कुछ सवालों को लेकर घिरते हुए नजर आते हैं. जैसे हाल ही में शिवराज सिंह चौहान के सामने एक छात्र ने एक ऐसा सवाल रख दिया जिसके जवाब में उन्हें असहज होते हुए देखा गया. दरअसल शिवराज सिंह यानि मामा जी से एक छात्र ने जातिवादी आरक्षण को लेकर सवाल किया. जिसे सुनकर मामा जी थोड़ा सा असहज हो गए.

लेकिन एक ख़ामोशी के बाद उन्होंने इस आरक्षण के पीछे की वजह को भी साफ़ किया. दरअसल छात्र ने मामा जी से यह सवाल पूछ लिया कि, मामाजी, कृपया जाति को शिक्षा में न लाएं. इसके साथ ही छात्र ने उनके सामने एक उदाहरण भी रखा. छात्र ने कहा- उसके आरक्षित श्रेणी (SC) के एक दोस्त को 77 प्रतिशत अंक आए हैं और उसे (GEN) 80 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं. लेकिन इसके बावजूद भी उसे लैपटॉप नहीं मिल रहा है लेकिन उसके दोस्त को लैपटॉप दिया जा रहा है.

इसके साथ ही छात्र ने अपनी पूरी बात रखते हुए बार-बार इस बात का उल्लेख जरुर किया कि, मामा जी शिक्षा में जाति क्यों देखी जा रही है. और 80 प्रतिशत लाने के बावजूद भी उसे लैपटॉप क्यों नहीं दिया जा रहा है. शिवराज सिंह चौहान ने इस छात्र के सवाल का जवाब भी दिया लेकिन इसके बाद भी उसके सवाल एक के बाद एक होकर शिवराज के सामने आते रहे और मामा जी अपने भांजे की बात का जवाब देने में असहज दिखाई देते रहे.

बता दें कि शिवराज  भोपाल के मॉडल स्कूल ऑडिटोरियम में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदेश के छात्रों से लाइव फोन इन कार्यक्रम के दौरान मुलाकात करने के लिए पहुंचे थे. इस दौरान संसथान के साथ ही अन्य संस्थानों के छात्रों ने भी उनसे तरह-तरह के सवाल किए. इस छात्र के द्वारा जैसे ही आरक्षण और जाति को लेकर होने वाले भेदभाव के बारे में बात की गई तो वहां मौजूद सभी छात्रों ने भी उसका समर्थन किया.

शिवराज ने अपने जवाब में यह भी कहा कि, “कुछ लोग विकास की मुख्यधारा में पीछे छूट गए थे, इस नाते अगर उन्हें कुछ रियायतें दी जाती हैं तो हमें शिकायत नहीं करनी चाहिए. हमारे देश में तरह-तरह के फूल हैं, हमें उनकी देखभाल करने और सभी की रक्षा करने की जरूरत है.” इसके साथ ही उन्होंने आरक्षण को सही भी ठहराया और यह भी कहा कि कई योजनाएं ऐसी हैं जो जाति पर आधारित नहीं हैं.

Published by Hitesh Songara on 22 May 2018

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