पीरियड्स के दौरान लड़कियों ने छोड़ा स्कूल जाना, ‘पैडमैन’ बनकर सामने आए हरी प्रसाद

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हमारे सामने कई बार कुछ ऐसी खबरें सामने आ जाती हैं जो हमें अंदर से विचलित कर के रख देती हैं. ऐसे में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो सामने आने वाली प्रोब्लेम्स से निपटने के लिए आगे आते हैं. हम आज जिन शख्स के बारे में बात कर रहे हैं उनका नाम है हरी प्रसाद. बता दें कि हरी प्रसाद उत्तर प्रदेश के खैराही गांव के मुखिया हैं. वे हमेशा से ही लड़कियों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं.

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कुछ दिनों पहले ही उनके सामने यह खबर आई कि उनके गाँव की दो लड़कियों ममता और प्रमिला ने पीरियड्स के कारण स्कूल जाना छोड़ दिया है. इस खबर ने उन्हें विचलित कर दिया क्योंकि वे शुरू से ही लड़कियों की पढ़ाई के समर्थन में थे. उन्होंने जब इस बारे में जानकारी इकट्ठा की तो उन्हें पता चला कि पीरियड्स के करण देश की 28 लाख लड़कियां स्कूल जाना छोड़ देती हैं.

उनका कहना है कि, ‘जिसे जीवन का आधार कहा जाता है लड़कियां उससे शर्मिंदा होकर स्कूल जाना छोड़ देती हैं.’

लोगों की मानसिकता को बदलने के लिए हरी प्रसाद ने एक जंग शुरू की है और वे गांव की लड़कियों के लिए पैडमैन बन गए हैं. मानसिकता के खिलाफ इस जंग में उन्हें एक सफलता तब मिली जब वे यूनिसेफ के प्रॉजेक्ट गरिमा से जुड़े. उन्होंने इस प्रोजेक्ट गरिमा के अंतर्गत आसपास के इलाकों मीरजापुर, जौनपुर और सोनभद्र में पीरियड्स के प्रति महिलाओं और लड़कियों को जागरूक करने का काम भी किया है.

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वे लड़कियों के पिताओं से खुलकर यह बात भी कहते है कि, यदि लड़कियों को पीरियड्स नहीं होंगे तो वे कभी मां भी नहीं बनेंगी. यह एक नेचुरल साइकिल है और इसमें शर्माने वाली कोई भी बात नहीं है. काउंसलिंग के बाद ही उन्होंने लड़कियों को सैनेटरी पैड भी उपलब्ध करवाए हैं. इसके साथ ही गांव में स्वास्थ्य विभाग में सैनिटरी पैड का स्टॉक भी रखवाया.

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इस घटना के बाद से ही लोग उन्हें ‘पैडमैन’ कहते हैं. गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ही अक्षय कुमार की फिल्म ‘पैडमैन’ रिलीज हुई थी जिसे लोगों ने काफी पसंद किया था. हालांकि इस बारे में हरी प्रसाद का कहना है कि, उन्हें फिल्म ‘पैडमैन’ के बारे में कुछ भी नहीं पता है लेकिन उन्हें सब पैडमैन कहकर बुलाते हैं. उनकी दो बेटियां हैं और वे उनसे पीरियड्स के बारे में खुलकर बातें करते हैं.

(वैसे उत्तर प्रदेश सरकार के आंकड़े देखे जाए तो यह सामने आता है कि यहाँ करीब 60 फीसदी लड़कियां पीरियड्स के दौरान स्कूल जाना छोड़ देती हैं. जबकि 19 लाख लड़कियां पीरियड्स के चलते पढ़ाई ही छोड़ देती हैं.)

Published by Hitesh Songara on 29 May 2018

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