रमजान से जुड़े 10 रोचक तथ्य जिनमें शामिल है ‘रहमतों’ से ‘जहन्नुम से बचाने के दौर’ तक का सफर

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मुस्लिम समुदाय के लोग ‘रमजान’ के पवित्र महीने को बहुत मानते हैं. इस दौरान लगभग दुनियाभर के सभी मुसलमान लोग सुबह से शाम तक रोजा रखते हैं. इसमें प्रार्थनाएं भी शामिल हैं और पापपूर्ण व्यवहार से परहेज भी शामिल है. रमजान की उत्पत्ति के बारे में बात करें तो यह मुस्लिम कैलेंडर का नौवां महीना है और इसे सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है. माना जाता है कि रमजान के महीने में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जो रोजे रखता हैं उसे ही जन्नत नसीब होती है. बताया जाता है इसी समय पैगंबर मोहम्मद को पवित्र पुस्तक ‘कुरान’ दी गई थी. ‘रमजान’ शब्द अरबी शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ है गर्मी या सूखापन. इस उत्सव के बारे में कई अज्ञात और दिलचस्प तथ्य हैं.

आइए उनके बारे में जानते हैं :-

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1. रमज़ान के पवित्र महीने में हर मुसलमान रोज़े रखता है लेकिन छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को छोड़कर.

2. हर मुसलमान के शाम की इफ्तार का खास भोजन खजूर होता है.  इसके पीछे कारण है कि पैगंबर मोहम्मद अपने रोज़े भी खजूर खाकर खोला करते थे.

3. रमज़ान का पाक महीना 30 दिन का होता है. हर दिन रोज़ा रखा जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस महीने हर रोज़ कुरान पढ़ने से ज़्यादा सबाब मिलता है.

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4. रमज़ान के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है. 10 दिन के पहले भाग को ‘रहमतों का दौर’ कहा जाता है. 10 दिन के दूसरे भाग को ‘माफी का दौर’ बताया जाता है और 10 दिन के आखिरी हिस्से को ‘जहन्नुम से बचाने का दौर’ बोला जाता है.

5. रमज़ान के महीने के एक दिन ‘शब-ए-कद्र’ मनाया जाता है, जो कि इस बार 11 जून को मनाया जाएगा. इस दिन सभी मुस्लिम रात भर जागकर अल्लाह की इबादत करते हैं.

6. रोज़े के दौरान मुसलमान खाने-पीने से दूर रहने के साथ-साथ शारीरिक संबंध, अपशब्द, गुस्सा करने से भी परहेज करते हैं. इस दौरान कुरान पढ़कर और सेवा करके अल्लाह का ध्यान किया जाता है.

 

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7. आप सभी ने देखा होगा कि रमज़ान की हर तस्वीर में लालटेन ज़रूर होता है. इस लालटेन की कहानी है कि रमज़ान के महीने में मिस्र के बाजारों में लोग बड़े-बड़े लालटेन लगाकर सड़कों को सजाया करते हैं. इसके पीछे मान्यता है कि मिस्र की राजधानी काहिरा में वहां के खलीफा का स्वागत में लालटेन लगा कर किया जाता है.

8. रोज़े की  शुरुआत सुबह सूरज के निकलने से पहले के भोजन से होती है जिसे सभी ‘सुहूर’ कहते हैं और सूरज डूबने के बाद करने वाले भोजन को ‘इफ्तार’ कहा जाता है.

9. रमज़ान ‘नेकियों का मौसम’ और ‘मौसम-ए-बहार’ नाम से भी जाना जाता है.

10. इस बार रमज़ान के महीने में 5 जुमे पड़ेंगे. रमज़ान का आखिरी जुमा 15 जून को होगा, जिसे अलविदा जुमा कहा जाता है.

Published by admin on 01 Jun 2018

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