‘वीरे दी वेडिंग’ के एक सीन की वजह से ट्रोल हुईं स्वरा भास्कर, मां ईरा भास्कर ने तोड़ी चुप्पी

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बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर इन दिनों अपनी हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ के एक सीन को लेकर ट्रोल हो रही हैं. बता दें इस फिल्म में स्वरा स्टीरियो टाइप लड़की के किरदार में नजर आई हैं. इस फिल्म के एक सीन में स्वरा मास्टरबेशन करते हुए वाइब्रेटर का इस्तेमाल करती हुई नज़र आईं हैं. जिस वजह से वे सोशल साइट्स पर खूब ट्रोल की जा रही हैं.

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वैसे स्वरा के इस तरह के सीन को फिल्माने के बाद तो यही कहा जा सकता है कि अब तक इंडस्ट्री में इस तरह का बोल्ड सीन अब तक नहीं फिल्माया गया होगा. लेकिन अब स्वरा भास्कर के ट्रोल को लेकर उनकी मां ईरा भास्कर ने भी चुप्पी तोड़ी है. ईरा भास्कर की मां एक फिल्म इतिहासकार हैं. वे टिश स्कूल ऑफ आर्ट्स से पीएचडी कर चुकी हैं और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में सिनेमा स्टडीज़ की प्रोफ़ेसर भी हैं.

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एक न्यूज़ पोर्टल से हुए इंटरव्यू के दौरान जब ईरा भास्कर से जब उनसे पिछले कुछ दशकों में स्क्रीन पर फीमेल सेक्शुअलिटी या प्लेज़र को फिल्माने के बारे में सवाल किए गए तो उन्होंने कहा, ‘मैं सबसे पहले यह कहना चाहूंगी कि वास्तव में सेक्शुअलिटी इंडियन सिनेमा का सब्जेक्ट नहीं, जिसे सीधे तौर पर व्यक्त किया जा सके. इतिहास पर नजर डालें तो हमारा सिनेमा इस वजह से यूनीक है क्योंकि पिछले कई सालों में हमारे सिनेमा में काफी विकास हुआ है और कामुकता जैसी शैली पर भी हमारा नजरिया बेहद साफ और मिलाजुला रहा है….और यह शैली गाना है.’

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आगे ईरा भास्कर ने कहा, ‘कई चीजें ऐसी हैं जिसे गाने के जरिए सीधे दर्शाया नहीं जा सकता. चाहे वह हिन्दी फिल्मों के गाने हों या फिर बंगाली, मलयालम हो या तमिल. आपको कहीं भी यह फंडामेंटल और डिफाइनिंग फीचर के रूप में नहीं दिखेगा. गाने के जरिए काफी अभिव्यक्ति पर्दे पर पेश की गई हैं. इमोशनल अभिव्यक्ति, वैसी अभिव्यक्ति जो टैबू हैं, जैसे सेक्शुअलिटी और इरॉटिज़म.’

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उदाहरण देते हुए वे कहती हैं, ‘एक बार मुग़ल-ए-आजम के गाने जोगन बन चली के बारे में सोचिए, वह शब्द जोगन वास्तव में मीरा के लिए है जो कि दुनिया भर में अपने प्रेम के लिए मशहूर है इसलिए यह किसी चीज के लिए आपके जुनून का सम्पूर्ण डेडिकेशन ही तो है. ये फिल्में सीधे सेक्शुअल ऐक्ट या लवमेकिंग ऐक्ट को प्रजेंट नहीं करती. महेश भट्ट ने कहा था कि इंडियन सिनेमा में सबसे इरॉटिक सीक्वेंस ‘मुगल-ए-आजम का है, जिसमें दिलीप कुमार मधुबाला के चेहरे पर हाथ फेरते हैं.’

आगे ईरा कहती हैं कि ‘फायर’, ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ और अब ‘वीरे दी वेडिंग’ जैसी फिल्मों में आप वैसी महिलाओं को देख सकते हैं जो सेक्शुअली एक्टिव हैं. उनकी जो चाहत है उस पर उन्हें कोई पछतावा नहीं. वे जो हैं उसके लिए अपमानित हों, उन्हें यह भी स्वीकार नहीं. उनकी चॉइस और काम उनके लिए सबसे जरूरी हैं.’

अपने विचार व्यक्त करते हुए ईरा ने कहा कि ये हालात इसलिए पैदा हुए हैं कि यहां महिलाओं को वास्तविकता के साथ पेश किया गया है और इसमें अभी वक्त लगेगा.

Published by Chanchala Verma on 06 Jun 2018

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