‘घिसी-पिटी धारणाओं से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है जोखिम लेना’ – स्वरा भास्कर

Get Daily Updates In Email

‘नील बटे सन्नाटा’ से लेकर ‘अनारकली ऑफ आरा’ तक अपनी एक्टिंग से दर्शकों के बीच एक खास जगह बना चुकी स्वरा भास्कर को दर्शकों ने हमेशा नए किरदार में ही देखा है. स्वरा भास्कर का कहना है कि वो जोखिम भरे किरदारों को निभाने से डरती नहीं हैं. स्वरा भास्कर कहती हैं, ‘मैं कभी जोखिम लेने से नहीं डरी. जब मैं फिल्म इंडस्ट्री में आई, मुझे पता नहीं था कि कैसे इसमें राह बनाई जाए, लोगों ने मुझे इस पर काफी सलाह दी कि क्या नहीं करना है. मुझसे किसी की बहन या नायिका की अच्छी सहेली का किरदार न निभाने के लिए बोला गया, क्योंकि तब मुझे सिर्फ सेकेंड लीड किरदार करने के प्रस्ताव मिलते थे.’

courtesy

हालही में रिलीज़ हुई फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ में स्वरा भास्कर लीड किरदार में नजर आ रही हैं. फिल्म को दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है. इस फिल्म में स्वरा एक बिंदास लड़की के किरदार में नजर आई हैं. दर्शकों को उनका यह किरदार काफी पसंद आ रहा है. वहीं ‘अनारकली ऑफ आरा’ में स्वरा एक नाचने-गाने वाली लड़की के किरदार में नजर आई थीं. अपनी एक्टिंग को लेकर स्वरा का कहना है कि अपने अभिनय करियर में खुद के नियमों को लागू करने के लिए घिसी-पिटी अवधारणाओं को तोड़ना सबसे अच्छा तरीका है.

courtesy

स्वरा ने आगे कहा, ‘मुझसे खलनायिका का और कम उम्र में मां का किरदार नहीं निभाने के लिए कहा गया. अब आप जानते हैं कि फिल्मों में मैंने कैसे-कैसे किरदार निभाए हैं. मुझे लगा कि अगर मुख्य भूमिका पाने के लिए ये नियम बने हैं तो फिर इन्हें क्यों न तोड़ा जाए? क्यों न घिसी-पिटी अवधारणाओं से छुटकारा पाकर अपने नियम लाए जाएं? मेरा मानना है कि इन घिसी-पिटी धारणाओं से निपटने का सबसे अच्छा तरीका जोखिम लेना, विफलता से डरे बिना नई चीजें करने की कोशिश करना है.’

Published by admin on 10 Jun 2018

Related Articles

Latest Articles