एक कवि के साथ ही पत्रकार भी रह चुके हैं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी

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कुछ ही समय पहले जॉन अब्राहम की फिल्म ‘परमाणु’ रिलीज़ हुई थी. जिसे बहुत पसंद भी किया गया था. इस फिल्म में पोखरण परिक्षण की कहानी दिखाई गई है. गौरतलब है कि ऑफिसर्स को इस परमाणु परिक्षण की अनुमति भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ही दी थी. भारत के प्रधानमंत्री रह चुके अटल बिहारी वाजपेयी के पिता एक टीचर थे.

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एक कवि के साथ ही पत्रकार रह चुके अटल बिहारी वाजपेयी जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे. उन्होंने अपने बोलने की कला से पहले ही लोगों का दिल जीत लिया था. सबसे पहले उन्होंने 1957 में जनसंघ को 3 लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ाया था. यह सीटें मथुरा, लखनऊ और बलरामपुर की थी. जहां मथुरा में अटल बिहारी वाजपेयी को जमानत तक नहीं मिली वहीं बलरामपुर से चुनाव जीतकर वो अगले पढ़ाव पर पहुंचे.

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अटल बिहारी वाजपेयी जनसंघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. इसके साथ ही उन्हें जेल में भी डाला गया था. साल 1977 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी थी और इसी दौरान उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया था. विदेश मंत्री रहकर कई जगह उन्होंने हिंदी में अपने भाषण दिए. वो ऐसे पहले इंसान थे जिन्होंने हिंदी को विश्व के सामने रखा था.

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साल 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी को बीजेपी का संस्थापक सदस्य बनाया गया था. जिसके बाद साल 16 मई 1996 को उन्हें भारत का प्रधानमंत्री बनाया गया था. लेकिन लोकसभा में बहुमत ना पाने की वजह से उन्हें प्रधानमंत्री के पद का त्याग करना पड़ा था. साल 1999 में एक बार फिर चुनाव हुए और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने. वह ऐसे पहले गैर कोंग्रेसी प्रधानमंत्री थे जिनका कार्यकाल पूरे 5 साल था.

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इसके साथ ही अटल बिहारी वाजपेयी को पंडित जवाहरलाल नेहरू भी पसंद किया करते थे. जब-जब वाजपेयी अपना भाषण देते थे जवाहर लाल नेहरू उन्हें ध्यान से सुनते थे. अटल हमेशा नेहरू की आलोचना करते थे लेकिन जवाहरलाल नेहरू को अटल बिहारी वाजपेयी में एक भावी प्रधानमंत्री दिखता था.

Published by admin on 12 Jun 2018

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