आध्यात्मिक गुरु बनने से पहले भय्यूजी महाराज कर चुके थे सियाराम ब्रांड के लिए मॉडलिंग

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आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने मंगलवार को खुद को गोली मारकर खुदखुशी कर ली है. भय्यूजी महाराज को इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल लेकर गए थे जहाँ डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. हालांकि उनकी खुदखुशी का कारण अभी तक सामने नहीं आ पाया है. भय्यूजी महाराज सुर्ख़ियों में तब आए थे जब उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाने में मुख्य भूमिका निभाई थी. अन्ना हजारे ने इन्हीं के हाथों से ज्यूस पीकर अपना अनशन तोड़ा था. मॉडर्न और राष्ट्रीय संत के नाम से जाने वाले भय्यूजी महाराज का जीवन काफी दिलचस्प रहा था.

आइए जानते हैं उनके जीवन के कुछ खास पहलू:

1968 में सुजालपुर के जमींदार परिवार में जन्में भय्यूजी महाराज का असल नाम उदयसिंह देशमुख था. उन्होंने बतौर मॉडल अपना करियर शुरू किया था एक ब्रांड के लिए उन्होंने एड में काम किया था. यह एड था सियाराम ब्रांड का, लेकिन जल्द ही उन्होंने अपना मॉडलिंग करियर को छोड़कर आध्यात्म का रास्ता चुन लिया था. भय्यूजी महाराज बाकि सभी आध्यात्म गुरूओं से काफी अलग थे क्योंकि वो ग्रहस्थ जीवन में रहते हुए भी संत सी ज़िंदगी जीते थे. उनकी पहली पत्नी का नाम माधवी था, जिनका दो साल पहले निधन हो गया. माधवी से उन्हें एक बेटी हैं जो पुणे में रह कर पढ़ाई कर रही हैं. अपनी बेटी और माँ का ख्याल रखने के लिए उन्होंने पिछले साल शिवपुरी की डॉक्टर आयुषी के साथ शादी की थी.

भय्यूजी महाराज कभी किसानों की तरह खेत जोतते और बोते हुए दिखाई देते थे तो कभी क्रिकेट खेलते हुए. इसी के साथ-साथ उन्हें घुड़सवारी, तलवारबाजी का भी शौक था. उन्हें कविताओं में भी काफी दिलचस्पी थी. उनके चहेतों का मानना है कि उन्हें भगवान दत्तात्रेय का आशीर्वाद मिला हुआ था.

वन सम्पदा में पशु-पक्षी आदि, प्राकृतिक सन्तुलन के अभिन्न अंग होते है। प्रकृति की एक समग्र जैव व्यवस्था होती है। उसमें मानव का स्वार्थपूर्ण दखल पूरी व्यवस्था को विचलित कर देता है। मनुष्य को कोई अधिकार नहीं प्रकृति की उस व्यवस्था को अपने स्वाद, सुविधा और सुन्दरता के लिए खण्डित कर दे। अप्राकृतिक रूप से जब इस कड़ी को खण्डित करने का दुष्कर्म होता है, प्रकृति में विनाशक विकृति उत्पन्न होती है जो अन्ततः स्वयं मानव अस्तित्व के लिए ही चुनौति बन खड़ी हो जाती है। जीव-जन्तु हमारी ही भांति इस प्रकृति के आयोजन-नियोजन का अटूट हिस्सा होते हैं। अतः हमारा परम कर्तव्य है कि अपने वन सम्पदा की रक्षा करने के साथ साथ, सभी जीव जंतुओं के प्रति दया, स्नेह एवं प्रेम की भावना रखें क्योंकि जीव दया से बड़ा कोई धर्म नहीं।

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प्रधानमंत्री बनने के पहले मोदीजी सद्भावना उपवास पर बैठे थे तब उनका उपवास तुड़वाने के लिए भय्यूजी महाराज को भी बुलाया गया था. शिवराज सिंह की सरकार ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया था लेकिन उन्होंने इसे यह कह ठुकरा दिया कि ‘संतों के लिए कोई पद नहीं होता है, हमारे लिए लोगों की सेवा का महत्व है.’ भय्यूजी महाराज की पहुंच हर क्षेत्र में थी, कई बड़े राजनेता, अभिनेता, गायक और बिज़नेसमैन सभी उनके आश्रम आते थे.

Published by admin on 12 Jun 2018

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