‘खुले व सुनसान इलाके में शौच करने की बात सोचने भर से डर लगता है’- भूमि पेडनेकर

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सामाजिक मुद्दे पर बनी फिल्म ‘टॉयलेट : एक प्रेमकथा’ में एक्टिंग से सभी का दिल चुकी एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर हाल ही में अपनी बात को लेकर चर्चा में आई हैं. एक्ट्रेस ने अपनी फिल्म से जुड़े शौच के मुद्दे को लेकर कहा कि, ‘खुले व सुनसान इलाके में शौच करने की बात सोचने भर से उन्हें डर लगता है.’

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बता दें कल ही ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ को रिलीज़ हुए एक साल हुआ है. भूमि का कहना है, ‘भारत में स्वच्छता संकट से सबसे ज्यादा महिलाएं जूझ रही हैं.’ आगे उन्होंने बताया, ‘मुझे सटीक आंकड़ा नहीं पता, लेकिन ऐसी रिपोर्ट्स हैं जो दिखाती हैं कि जिन इलाकों में शौचालय व स्वच्छता संबंधी सुविधाएं नदारद हैं, वहां महिलाएं शौच जाने के लिए अंधेरा होने का इंतजार करती हैं या फिर सुनसाने इलाके में जाती हैं, जिसके चलते दुष्कर्म या छेड़छाड़ की घटनाएं देखने को मिलती हैं.’

आगे भूमि ने कहा, ‘मैं बीच सुनसान इलाके में कपड़े उठाकर शौच करने की कल्पना भी नहीं कर सकती. इससे मुझे डर लगता है. मेरा जीवन खतरे में पड़ सकता है, क्योंकि कुछ भी हो सकता है. लेकिन, गांव-देहात में ऐसी हजारों महिलाएं हैं जो लंबे अरसे से ये सब कर रही हैं. जरा कल्पना कीजिए कि वे किस तरह का खतरा मोल ले रही हैं. यह हैरान कर देने वाली बात है.’

भूमि ने सार्वजनिक शौचालयों के इस्तेमाल पर पैसा लेने की बात पर कहा कि, ‘शौचालयों के इस्तेमाल पर लोगों से शुल्क वसूलना उनकी समझ के परे है. सार्वजनिक जगहों पर शौचालयों का इस्तेमाल नि:शुल्क कर देना चाहिए. यह हर नागरिक का मूलभूत अधिकार है.

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अपनी फिल्म की बात करते हुए भूमि ने कहा कि, ‘टॉयलेट : एक प्रेमकथा’ से काफी बदलाव देखने को मिला है.’

एक्ट्रेस ने यह भी बताया कि जब उन्होंने फिल्म की स्टोरी पढ़ी थी तब वे यह जानकर हैरान रह गईं थी कि भारत में 58 फीसदी लोग खुले में शौच करते हैं, लेकिन फिल्म की रिलीज के बाद जब लोगों ने इसे देखा तब पाया गया कि कई स्वच्छता अभियानों की बदौलत इसमें गिरावट देखने को मिली है.

भूमि का यह भी मानना है कि जब तक देश के लोग स्वच्छता के प्रति संजीदा नहीं होंगे, तब तक हमारे देश में स्वच्छता में कमी जैसी समस्या हल नहीं हो सकती.

Published by Chanchala Verma on 13 Aug 2018

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