फिल्म रिव्यू : आजाद भारत को गोल्ड दिलाने के संघर्ष की कहानी है अक्षय की ‘गोल्ड’

Get Daily Updates In Email

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बीते कई दिनों से हमें बायोपिक पर बनी हुई फ़िल्में देखने को मिल रही हैं. हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘संजू’ को ही देख लीजिए. यह फिल्म बॉलीवुड स्टार संजय दत्त की लाइफ पर बनी थी जिसमें रणबीर कपूर ने संजय दत्त का किरदार निभाया था. वहीँ बात करें अक्षय कुमार की तो वे भी बायोपिक्स, सच्ची घटनाओं और सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों को लेकर सामने आ रहे हैं. अब एक बार फिर उन्हें फिल्म ‘गोल्ड’ में देखा जा रहा है, इस फिल्म में वे हॉकी कोच तपन दास के किरदार में नजर आ रहे हैं.

फिल्म को आज ही बॉक्स ऑफिस पर रिलीज किया जा चुका है और शुरुआत से ही यह दर्शकों पर अपना जादू दिखाने में कामयाब हो रही है. हमेशा से ही अक्षय कुमार अपने फैंस को अपनी एक्टिंग से खुश करते आए हैं और अब इस फिल्म से भी यह सिलसिला ऐसे ही बरकरार दिखाई दे रहा है. फिल्म में अक्षय के साथ ही मौनी का भी जलवा दिखाई दे रहा है.

अब चलिए बताते हैं आपको फिल्म की कहानी :

फिल्म की शुरुआत साल 1936 के हॉकी वर्ल्ड कप के मैच से होती है जहां हिटलर को भी मैच देखते हुए बताया जा रहा है. इस वक्त भारत भी आजाद नहीं हुआ था और ब्रिटिश इंडिया टीम खेल रही थी. यहीं तपन दास यानि अक्षय टीम के मेनेजर बने हुए हैं.

इसके बाद खुद अक्षय टीम का चयन करते हैं और आजाद भारत के लिए टीम बनाते हैं. वे इस नई टीम के भी मैनेजर बने हैं जिसमें कई खिलाड़ियों का चयन किया गया है. साल 1948 में ओलंपिक शुरू होते हैं जिसमें भारत ब्रिटेन को 8-1 से हराकर जीत हासिल करता है. ऐसे में कई बार वर्ल्ड वॉर के कारण मैच कैंसल हो जाता है तो कभी भारत-पाकिस्तान के बटवारे के कारण.

इन सब बातों के बीच शुरू होता है अक्षय का अपनी टीम को खड़ा करने का संघर्ष और इस संघर्ष में साथ देते सभी खिलाड़ियों का भी संघर्ष. कैसे टीम इंडिया आगे अपनी जगह को कायम रख पाती है और कैसे गोल्ड भारत आता है. यह जानने के लिए आपको फिल्म देखना होगी.

फिल्म में अक्षय के अभिनय की तारीफ तो की ही जा रही है साथ ही मौनी से लेकर सभी किरदारों की एक्टिंग को भी काफी सराहा जा रहा है.

Published by Hitesh Songara on 15 Aug 2018

Related Articles

Latest Articles