‘अटल जी के लिए राष्ट्र सर्वोपरि था बाकि किसी चीज का कोई महत्व नहीं था’- नरेन्द्र मोदी

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कमी आज पूरे देश को खल रही है. कल भारत देश ने एक अनमोल रत्न खोया है. उनके जाने के गम में पक्ष, विपक्ष, खेल, सिनेमा सभी क्षेत्र के लोगों और भारत की जनता को काफी दुःख पहुंचा है. राष्ट्रपति से लेकर उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने भी उनके जाने पर दुःख जताया है.

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भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में अपने ब्लॉग पर ‘मेरे अटल जी’ नाम से एक ब्लॉग लिखा है. उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा कि, ‘वे पंचतत्व हैं. वे आकाश, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, सबमें व्याप्त हैं, वेअटल हैं, वे अब भी हैं. जब उनसे पहली बार मिला था, उसकी स्मृति ऐसी है जैसे कल की ही बात हो. इतने बड़े नेता, इतने बड़े विद्वान. लगता था जैसे शीशे के उस पार की दुनिया से निकलकर कोई सामने आ गया है. जिसका इतना नाम सुना था, जिसको इतना पढ़ा था, जिससे बिना मिले, इतना कुछ सीखा था, वो मेरे सामने था. जब पहली बार उनके मुंह से मेरा नाम निकला तो लगा, पाने के लिए बस इतना ही बहुत है. बहुत दिनों तक मेरा नाम लेती हुई उनकी वह आवाज मेरे कानों से टकराती रही. मैं कैसे मान लूं कि वह आवाज अब चली गई है.’

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नरेन्द्र मोदी ने अपने ब्लॉग में आगे लिखा कि, ‘उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि था बाकि किसी चीज का कोई महत्त्व नहीं था. ‘इंडिया फर्स्ट, भारत प्रथम’ यह मंत्र वाक्य उनका जीवन मंत्र था. पोखरण देश के लिए जरूरी था तो चिंता नहीं की प्रतिबंधों और आलोचनाओं की क्योंकि देश प्रथम था. सुपर कंप्यूटर नहीं मिले, क्रायोजेनिक इंजन नहीं मिले तो परवाह नहीं, हम खुद बनाएंगे, हम खुद अपने दम पर अपनी प्रतिभा और वैज्ञानिक कुशलता के बल पर असंभव दिखने वाले कार्य संभव कर दिखाएंगे और साथ में ऐसा किया भी और दुनिया को चकित कर दिया. सिर्फ एक ताकत उनके भीतर काम करती थी वह सिर्फ उनकी देशभक्ति थी.’

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राष्ट्रभक्ति की भावना, जनसेवा की प्रेरणा उनके नाम के ही अनुकूल अटल रही. भारत उनके मन में रहा, भारतीयता उनके तन में थी. उन्होंने देश की जनता को ही अपना आराध्य माना था. भारत के कण-कण और बूंद-बूंद को पवित्र और पूजनीय माना था. जितना सम्मान, जितनी ऊंचाई अटल बिहारी वाजपेयी को मिली उतने ही वह ज़मीन से जुड़ते गए. अपनी सफलता को कभी भी उन्होंने अपने मस्तिष्क पर प्रभावी नहीं होने दिया. प्रभु से यश की कामना अनेक व्यक्ति करते हैं लेकिन ये अटल बिहारी वाजपेयी ही थे जिन्होंने कहा, ‘हे प्रभु! मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना गैरों को गले ना लगा सकूं, इतनी रुखाई कभी मत देना’ अपने देशवासियों से इतनी सहजता और सरलता से जुड़े रहने की यह कामना ही उनको सामाजिक जीवन के एक अलग पायदान पर खड़ा करती है’.

Published by Yash Sharma on 17 Aug 2018

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