वुमेन्स फ्री स्टाइल रैसलिंग में दिव्या ने जीता ब्रॉन्ज, चोट के बाद भी 90 सेकंड में जीता मैच

Get Daily Updates In Email

18 वें एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ी लगातार अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं. मंगलवार के दिन भारत की और से महिला पहलवान दिव्या काकरण ने चाइना की चेन वेनलिंग को हराया और अपने नाम कांस्य पदक कर लिया था. दिल्ली की रैसलर दिव्या काकरण सेन ने एशियाई गेम्स के 68 किलोग्राम वुमैंस फ्री स्टाइल रैसलिंग में ब्रॉन्ज जीत लिया है.

courtesy

इससे पहले दिव्या गोल्ड की रेस से बाहर हो गई थीं. दिव्या को मंगोलिया तुमेनटसेटसेग शारखु ने क्वाटर फाइनल 11-1 से मात दी थी. क्वाटर फाइनल के बाद उनका गोल्ड जीतने का सपना टूट गया था जिसके बाद उन्हें कांस्य पदक के लिए मैंच खेलने का मौका मिला, जहां उन्होंने बाजी मार ली थी. दिव्या ने पहले मैच में पहले ही मिनट में 6-0 की लीड बना ली थी. इसके बाद एक पावरफुल टैकल लगाया. टैक्निकल एनालिसिस के साथ ही दिव्या को विजेता घोषित कर दिया गया. दिव्या को पूरी बाउट जीतने में महज 90 सेकंड ही लगे.

courtesy

दिव्या के पदक जीतने के बाद उनके पिता सूरज पहलवान ने आईएएनएस से फोन पर कहा, ‘बहुत खुश है. जूनियर एशियाई चैंपियनशिप में भी दिव्या ने जीता था. उससे पहले राष्ट्रमंडल खेलों में भी दिव्या पदक जीतकर आई थी अब उसने पहली बार एशियाई खेलों में भी पदक जीता है हमें बहुत ख़ुशी हो रही है. उनके पिता ने आगे बाते की, ‘मेरी दिव्या से मैंच से पहले बात हुई थी तो दिव्या ने बताया था कि उसे पैर में भी चोट लगी है. पर फिर भी दिव्या ने हार नहीं मानी और भारत को पदक दिलाया.’ बता दें कि दिव्या ने इससे पहले कॉमनवैल्थ गेम्स में भी ब्रॉन्ज जीता था. इसके अलावा वह एशियन चैम्पियनशिप में सिल्वर और कॉमनवैल्थ गेम्स में गोल्ड भी जीत चुकी हैं.

courtesy

बता दें यूपी के जिला मुज्जफर नगर के गांव पुरबालियान की रहने वाली साधारण परिवार से निकली दिव्या पहली बार तब चर्चा में आई थीं जब यूपी में एक नामी दंगल के दौरान उन्होंने पुरुष पहलवान को चित कर दिया था. दिव्या के इलाके में उनकी पहचान ही ऐसे पहलवान के रूप में है जो नामी दंगलों में लड़कों से टक्कर लेती है. दिव्या का भाई भी कुश्ती का खिलाड़ी रहा है ऐसे में बचपन में भाई को दंगल में जाता देख दिव्या ने भी घर में ही प्रैक्टिस शुरू कर दी थी. दिव्या के पिता सूरज पहलवान घर में आर्थिक तंगी के कारण पहलवानों के कपड़े सिलकर घर का खर्चा चलाते हैं.

Published by Yash Sharma on 22 Aug 2018

Related Articles

Latest Articles