स्वप्ना बर्मन ने हेप्टाथलन में गोल्ड जीतकर रचा इतिहास, मां ने पूरा दिन मंदिर में की बेटी के लिए प्रार्थना

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भारत ने 18 वें एशियाई गेम्स में कल खेले गए मुकाबले में दो गोल्ड हासिल किए जिनमें से एक गोल्ड स्वप्ना बर्मन ने हेप्टाथलन में हासिल किया. पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गांव की रहने वाली 21 साल की स्वप्ना ने दो दिन तक चली सात स्पर्धाओं में 6026 अंक बनाए. इस दौरान उन्होंने ऊंची कूद 1003 अंक और भाला फेंक 872 अंक में पहला तथा गोला फेंक 707 अंक और लंबी कूद 865 अंक में दूसरा स्थान हासिल किया था.

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स्वप्ना के पिता पंचन बर्मन रिक्शा चलाते हैं लेकिन बीते कुछ समय से उम्र के साथ हुई बीमारी के कारण बिस्तर पर रहते हैं. आर्थिक कठिनाईयां कदम-कदम पर स्वप्ना बर्मन को चुनौती देती रहीं. एक समय ऐसा भी था कि जब स्वप्ना के पास अच्छे ढंग के जूते भी नहीं थे. फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और भारत का नाम रोशन कर दिया. स्वप्ना की मां ने अपने आप को काली माता के मंदिर में बंद कर लिया था. मां ने अपनी बेटी को इतिहास रचते नहीं देखा क्योंकि वह बेटी के लिए दुआ करने में जुटी थीं. स्वप्ना की जीत के बाद उन्हें बधाइयाँ मिलने पर उन्हें इसका पता चला.

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स्वप्ना की मां ने कहा कि,’ मैंने उसका प्रदर्शन नहीं देखा. मैं दिन के दो बजे से प्रार्थना कर रही थी.यह मंदिर उसने बनाया है. मैं काली मां को बहुत मानती हूं. मुझे जब उसके जीतने की खबर मिली तो मैं अपने आंसू रोक नहीं पाई. मैंने उसका प्रदर्शन नहीं देखा. यह उसके लिए आसान नहीं था. हम हमेशा उसकी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते थे, लेकिन उसने कभी भी शिकायत नहीं की.’

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स्वप्ना के बचपन के कोच सुकांत सिन्हा ने कहा कि, ‘मैं 2006 से 2013 तक उसका कोच रहा हूं. वह काफी गरीब परिवार से आती है और उसके लिए अपनी ट्रेनिंग का खर्च उठाना मुश्किल होता है. जब वह चौथी क्लास में थी तब ही मैंने उसमें प्रतिभा देख ली थी. इसके बाद मैंने उसे ट्रेनिंग देना शुरू किया.’ टिप्पणियां उन्होंने कहा, ‘वह बेहद जिद्दी है और यही बात उसके लिए अच्छी भी है. राइकोट पारा स्पोर्टिग एसोसिएशन क्लब में हमने उसे हर तरह से मदद की. आज मैं बता नहीं सकता कि मैं कितना खुश हूं.’

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इस तरह से 18वें एशियाई खेलों में भारत को ऐथलेटिक्स में मिला कुल पांचवा पदक है. वहीं एशियाई खेलों में यह भारत का 11वां गोल्ड और कुल 54 वां मेडल है.

Published by Yash Sharma on 30 Aug 2018

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