श्री कृष्ण जन्माष्टमी आज, भगवान कृष्ण के जन्मदिन पर जानिए उनकी 16108 पत्नियों की रोचक कहानी

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आज भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म दिवस है जिसे हम सब श्री कृष्ण जन्माष्टमी  रूप में मनाते हैं. भादवा कृष्ण ने अष्टमी के दिन मथुरा की जेल में देवकी और वासुदेव के यहां जन्म लिया था. भगवान कृष्ण की अनेक कहानियां, लीलाएं हमने सुनी और पढ़ी हुई हैं. जिनमें उनके बाल काण्ड से लेकर महाभारत तक के सारे किस्से आ जाते हैं. कृष्ण जी की लीलाएं और उनके चमत्कार हिन्दू धर्म में एक अलग ही अमिट छाप छोड़ गए हैं.

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ऐसे ही एक लीला उनकी जिसके बारे में खूब प्रचलन है कि उनकी लगभग 16108 पत्नियां थीं. लेकिन अधिकतर लोग यह नहीं जानते कि कैसे उन्होंने यह लीला रची थी.

चलिए हम बताते हैं : कृष्ण जी ने अपनी पहली पत्नी रुकमनी से विवाह किया था. उसके बाद वह पांडव से मिलने इन्द्रप्रस्थ गए इस दौरान एक दिन अर्जुन को साथ लेकर भगवान कृष्ण वन विहार के लिए निकले. जिस वन में वे विहार कर रहे थे वहां पर सूर्य पुत्री कालिन्दी भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने की कामना से तप कर रही थीं.

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कालिन्दी की मनोकामना पूर्ण करने के लिए श्रीकृष्ण ने उसके साथ विवाह कर लिया. फिर वह एक दिन उज्जयिनी की राजकुमारी मित्रबिन्दा को स्वयंवर से वर लाए. उसके बाद कौशल के राजा नग्नजित के सात बैलों को एकसाथ नाथ कर उनकी कन्या सत्या से पाणिग्रहण किया. तत्पश्चात उनका कैकेय की राजकुमारी भद्रा से विवाह हुआ. भद्रदेश की राजकुमारी लक्ष्मणा भी कृष्ण को चाहती थीं लेकिन परिवार कृष्ण से विवाह के लिए राजी नहीं था तब लक्ष्मणा को श्रीकृष्ण अकेले ही हरकर ले आए.

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कृष्ण अपनी आठों पत्नियों के साथ सुखपूर्वक द्वारिका में रह रहे थे तब राजा इंद्र ने उनसे आकर भौमासुर के अत्याचारों से बचाने की विनती की थी. जिसके बाद कृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा को लेकर भौमासुर को मारने गए. भौमासुर को स्त्री के हाथों मरने का वरदान था इसली उन्होंने अपनी सत्यभामा को इसमें अपना सारथी बनाया. युद्ध के बाद में कृष्ण ने सत्यभामा की सहायता से उसका वध कर डाला. इस तरह भौमासुर को मारकर श्रीकृष्ण ने उसके पुत्र भगदत्त को अभयदान देकर उसे प्रागज्योतिष का राजा बनाया.

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भौमासुर के द्वारा हरण कर लाई गईं लगभग 16,000 कन्याओं को श्रीकृष्ण ने मुक्त कर दिया. यह सभी अपहृत नारियां थीं या फिर भय के कारण उपहार में दी गई थीं और किसी और माध्यम से उस कारागार में लाई गई थीं. सामाजिक मान्यताओं के चलते भौमासुर द्वारा बंधक बनकर रखी गई इन नारियों को कोई भी अपनाने को तैयार नहीं था तब अंत में श्रीकृष्ण ने सभी को आश्रय दिया और उन सभी कन्याओं ने श्रीकृष्ण को पति रूप में स्वीकार किया. इस तरह से कहते हैं की भगवान श्री कृष्ण के 16108 पत्निया थीं.

Published by Yash Sharma on 03 Sep 2018

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