टीचर्स डे : ‘कहीं से भी कुछ सीखने को मिले तो उसे तभी अपने जीवन में उतार लेना चाहिए’ – डॉ. राधाकृष्णन

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आज हमारे देश में 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन सभी अपने-अपने गुरुओं के प्रति अपना प्यार और सम्मान दर्शाते हैं. शिक्षक दिवस पर सभी शिष्य अपने गुरु का सम्मान करते. यह दिन गुरुओं को समर्पित होता है. इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की एक वजह यह भी है कि इस दिन हमारे देश के पहले उप-राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है.

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डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद और महान दार्शनिक थे. राजनीति में आने से पहले डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक सम्मानित अकादमिक थे. वह कई कॉलेजों में प्रोफेसर भी रह चुके हैं. वह ऑक्सफार्ड विश्वविद्यालय में 1936 से 1952 तक प्राध्यापक भी रहें. कलकत्ता विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले जॉर्ज पंचम कॉलेज के प्रोफेसर के रूप में 1937 से 1941 तक कार्य किया. उन्होंने 1946 में यूनेस्को में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. उन्हें भारत की ओर से 1954 में भारत रत्न से नवाज़ा गया.

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इस दिन शिक्षक दिवस बनाए जाने की कहानी यह है कि भारत का राष्ट्रपति होने के बाद उनके कुछ दोस्तों और शिष्यों ने उनसे उनका जन्मदिन मनाने की अनुमति देने के लिए कहा था. इस पर उन्होंने कहा था कि, ‘मेरे जन्मदिन का जश्न मनाने की बजाय सभी को 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो मुझे गर्व महसूस होगा’. राधा कृष्णन का कहना था कि जब कभी भी कहीं से भी कुछ सीखने को मिले तो उसे तभी अपने जीवन में उतार लेना चाहिए. वह अपने छात्रों को पढ़ाते वक्त उनको पढ़ाई कराने से ज्यादा उनके बौद्धिक विकास पर ध्यान देते थे.

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साल 1962 से लेकर अभी तक इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने लगे हैं. दुनियाभर में टीचर्स डे मनानें के अलग-अलग दिन निर्धारित है. जबकि यूनेस्को ने 5 अक्टूबर को शिक्षक दिवस मनाने का दिन निर्धारित किया हुआ है. लगभग 100 से ज्यादा देश पूरी दुनिया में 5 अक्टूबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाते है.

Published by Yash Sharma on 05 Sep 2018

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