आलसियों पर आई डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट, भारत में बढ़ रही है युवा आलसियों की संख्या

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एक तरफ जहां देश में हर कहीं टेक्नोलॉजी बढ़ती हुई नजर आ रही हैं तो वहीँ कुछ और सेक्टर ऐसे भी हैं जिनपर हम ध्यान नहीं दे रहे हैं. हमारे ध्यान ना देने के कारण ही हम उन सेक्टर में पिछड़ने भी लगे हैं. जैसे हम अगर बात करें आलस के मामले में तो देश के युवा आलसी होते जा रहे हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का ऐसा कहना है. चलिए बताते हैं कैसे :

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दरअसल हाल ही में डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट सामने आई है जिसके अनुसार भारत देश में आधी से भी अधिक युवाओं की आबादी आलसी हो रही है. यानि कि शारीरिक रूप से भारतीय लोग कम एक्टिव रहने लगे हैं. यही नहीं भारत के युवा इस मामले में कई देशों जैसे चीन, पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार के लोगों से भी पीछे छुट गए हैं.

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डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत के 34 फीसदी लोग इनसफिशिएन्ट फिजिकली एक्टिव यानि शारीरिक रूप से काफी कम एक्टिव हैं. बीते कुछ सालों में युवाओं के इस आलस्य का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है. जैसे इससे पहले एक सर्वे 2001 में किया गया था. इस दौरान देश के 32 फीसदी लोग इनसफिशिएन्ट फिजिकली एक्टिव थे. जिसके बाद डब्ल्यूएचओ के द्वारा अगले 15 सालों का डेटा ट्रैक किया गया था.

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2016 में इस आंकड़े में कमी होने की बजाय यह 2 फीसदी बढ़ चुका था. बता दें कि डब्ल्यूएचओ के द्वारा विश्व के 168 देशों के करीब 19 लाख लोगों पर अध्ययन किया गया था, जिसमें भारत के भी करीब 77 हजार लोग शामिल किए गए थे. इस अध्ययन में भारत को 52वां स्थान मिला.

इसके साथ ही यह भी बताया गया कि फिजिकली कम एक्टिव होने के कारण दुनिया की करीब डेढ़ करोड़ युवा आबादी को 6 तरह की बीमारियों का खतरा है. अचरज की बात यह है कि भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाऐं और कम एक्टिव रही हैं. इस मामले में डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि, उनके द्वारा 2025 तक दुनियाभर की फिजिकल एक्टिविटी को 10 फीसदी और 2030 तक 15 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है.

Published by Hitesh Songara on 06 Sep 2018

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