2 साल की मेहनत से इंदौर पहुंचा है स्वच्छता सर्वेक्षण में 149 से नंबर 1 तक, जानिए कैसे होता है काम…

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इंदौर शहर आज पूरे देश में अपनी सफाई की वजह से पहचाना जाने लगा है. यह बिज़नसमैन के लिए मिनी मुंबई है. एक समय पर इंदौर को बेहद गंदा और कस्बाई क्षेत्र माना जाता था. लेकिन 2 साल से ज्यादा की मेहनत के बाद आज इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर बन चुका है.

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2 अक्टूबर साल 2014 में जब स्वच्छ भारत अभियान शुरू हुआ था उस समय स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर की जगह 149वीं थी. शहर के लोगों के साथ नगर निगम कर्मचारीयों की मेहनत से आज इंदौर पहना पायदान पर 2 सालों से बना हुआ है.

इंदौर की महापौर मालिनी गौड़ और नगर निगम आयुक्त मनीष सिंह के साथ ही जनप्रतिनिधियों ने पहले सफाई का मॉड्यूल तैयार किया. मनीष सिंह का कहना है, ‘सबसे पहले शहर के हर हिस्से को साफ-स्वच्छ बनाने की योजना के लिए उन दिनों के हालात का विश्लेषण किया गया. मुझे गंदगी मुक्त बनाने के अभियान के लिए अधिकारियों से लेकर सफाइकर्मियों और कचरा वाहनों के चालकों की टीम बनाई गई. दिन-रात काम शुरू हुआ. निगम ने अपने संसाधनों का आकलन किया. निगम कर्मचारियों की सूची बनाई तो पता चला सैकड़ों कर्मचारी ड्यूटी पर आते ही नहीं. इस पर सख्ती की गई और 700 से ज्यादा नियमित और अस्थाई कर्मचारियों को या तो निलंबित किया गया या नौकरी से बाहर कर दिया गया.’

आगे उन्होंने बताया, ‘कबाड़ बताकर गैरेज में खड़ी कर दी गईं निगम की गाड़ियों को निकालकर सुधारा गया. मात्र 200 वाहनों से व्यवस्था शुरू करने के बाद दो साल में निगम के पास 700 से ज्यादा गाड़ियां हैं. कुल मिलाकर कचरे के निस्तारण के लिए नई व्यवस्था की जरूरत साफ दिखाई दी. निगम ने शहर से कचरा पेटियां हटाने का निर्णय लिया. इसकी सफलता घर-घर कचरा कलेक्शन मॉडल की सफलता पर ही निर्भर थीं. कचरा इकट्ठा कर ट्रेंचिंग ग्राउंड में जमा किया जाता है. वहां खाद बनाने में इसका इस्तेमाल होता है. कुछ इलाकों में कचरा कलेक्शन सफल रहा तो पहले उन इलाकों से पेटियां हटाई गई. बाद में पूरे शहर से कचरा पेटियां हटा दी गईं. इस निर्णय को सबसे ज्यादा सराहा गया.’

आगे मनीष बताते हैं, ‘इसके अलावा मुझे खुले में शौच से मुक्त करने में भी निगम ने प्रशासन के साथ मिलकर पूरी कवायद की. खुले में शौच करने वालों को प्रताड़ित करने के बजाय उनकी मानसिकता बदलने के प्रयास हुए. आगे वे बताते हैं कि सड़कों पर जगह-जगह डस्टबिन है. लोगों को जागरूक बनाए रखने के लिए शहर को स्वच्छता के बैनर पोस्टर से पाट दिया गया, वॉल पेंटिंग्स बनाई गई हैं. जगह-जगह टॉयलेट्स की व्यवस्था की गई. मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी महसूस हो रही है कि एक बहुत बड़े जन-जागरण अभियान की शुरुआत की गई जिसमें राजनैतिक नेतृत्व के साथ ही गणमान्य नागरिक शामिल हुए. कोशिशें तेज हुईं और अंततः कामयाबी मिली. सांसद और लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के मुताबिक, ऊंचाई पर पहुंचना कठिन है, लेकिन उस पर बने रहना उससे भी बड़ी चुनौती है.’

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इसके अलावा शहर को साफ और बेहतर बनाने के लिए कई विशेषज्ञों और जिम्मेदार अफसरों से भी राय ली गई. शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को इम्पोर्टेंस ददिया गया जिसके अनुसार उन्हें सुधारने के सुझाव दिए हैं. जिसके बाद यह महसूस किया गया कि सड़कों पर सफाई जरुरी है.

Published by Chanchala Verma on 06 Sep 2018

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