गणेश स्थापना और पूजन से पहले जरूर जानें इसकी सही विधि और मुहूर्त

Get Daily Updates In Email

आज पूरे देश में गणेश चतुर्थी का त्यौहार मनाया जा रहा है. पूरे साल सभी इस त्यौहार का बड़ी बेसब्री से इन्तजार करते हैं. यह साल का सबसे ज्यादा दिनों तक चलते वाला त्यौहार है. आज हम सभी अपने-अपने घरों में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने वाले हैं. तो इससे पहले चलिए आपको बताते हैं प्रतिमा को स्थापित करने के साथ ही पूरी पूजा की विधि ताकि आप पर गणेश जी की कृपा बनी रहे.

सबसे पहले जानते हैं गणेश चतुर्थी 2018 का शुभ मुहूर्त:

बुधवार 12 सितंबर को शाम 4:07 बजे के बाद से चतुर्थी शुरू हो जाएगी और गुरुवार 13 सितंबर को दोपहर 2:51 बजे तक चतुर्थी रहेगी.

गणेश पूजन के लिए मध्याह्न मुहूर्त:

गुरुवार 13 सितंबर को सुबह 11:02:34 से 13:31:28 तक पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त है.

पूजन के लिए शुभ अवधि : 2 घंटे 28 मिनट

Courtesy

राहुुकाल:

13 सितंबर को दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक का समय राहुुकाल का होगा. जिस वजह से इस समय में पूजा नहीं की जा सकती. इसलिए इससे पहले ही पूजन करें.

चन्द्र दर्शन का वर्जित समय –

12 सितंबर 2018 को 16:08:43 से 20:32:00 तक का समय और 13 सितंबर 2018 को 09:31:59 से 21:11:00 तक का समय चंद्र दर्शन के लिए वर्जित है.

Courtesy

ऐसे करें गणेश जी की मूर्ति स्थापित – 

गणेश जी को लाने से पहले पूरे घर को अच्छे से साफ कर लें और व्यवस्थित तरीके से पूजा की थाली तैयार कर लें. भगवान के स्वागत के लिए घर के दरवाजे पर ही उनकी आरती करें. गणपति मंत्र उच्चारण के साथ ही शुभ मुहूर्त देखकर गणेश जी मूर्ति को पूजा स्थान पर स्थापित करें. इस बात का जरूर ध्यान रखें कि राहुकाल में गणेश जी की पूजा ना हो.

गणेश जी की स्थापना के समय उनके उन्के हाथ की तरफ जल से भरा हुआ कलश चावल या गेहूं के ऊपर स्थापित करें और धूप व अगरबत्ती लगाएं. कलश के मुख पर मौली बांधें एवं आमपत्र के साथ एक नारियल उसके मुख पर रखें. इस बता का जरूर ध्यान रखें कि नारियल की जटाएं ऊपर की ओर हो. गणेश जी के स्थान के सीधे हाथ की तरफ घी का दीपक एवं दक्षिणावर्ती शंख रखना चाहिए.

Courtesy

जानें पूरी पूजन विधि  –

1. पूजन की शुरुआत में अपने हाथ में अक्षत, जल एवं पुष्प लें. जिसके बाद स्वस्तिवाचन, गणेश ध्यान एवं समस्त देवताओं का स्मरण करें.

2. इसके बाद अक्षत एवं पुष्प चौकी पर समर्पित करें. जिसके बाद एक सुपारी में मौली लपेटकर उसे चौकी पर थोड़े-से अक्षत रख इस सुपारी को स्थापित करें.

3. भगवान गणेश का आह्वान करने के बाद कलश का पूजन करें.

4. कलश को उत्तर-पूर्व दिशा की ओर या चौकी की बाईं ओर स्थापित करें और कलश की पूजा के बाद दीप पूजन करें.

5. जिसके बाद पंचोपचार या षोडषोपचार के द्वारा गणेश पूजन करें.

6. परंपरा के अनुसार पूजा कर आरती करें.

Courtesy

गणेश जी का पसंदीदा भोग जरूर जरूर लगाएं –

स्थापना करने के बाद पूरे परिवार के लोग मिलकर गणेश जी की आरती करें और उन्हें उनके पसंदीदा पकवान जैसे मोदक और लड्डू का भोग लगाएं और पंच मेवा भी रखें.

Published by Chanchala Verma on 12 Sep 2018

Related Articles

Latest Articles