कुछ अहम बदलावों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी आधार की संवैधानिकता

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किसी भी सरकारी काम के लिए आज आधार कार्ड की अनिवार्यता काफी बढ़ गई है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर एक अहम फैसला दिया है. इस फैसले में कुछ शर्तों के साथ आधार को वैध किया जा चुका है. जी हां, कुछ बदलाव के बाद आधार की संवैधानिकता बरकरार रखी गई है.

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कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि, आधार से निजता हनन के सुबूत नहीं मिले हैं. वहीं शीर्ष अदालत ने अवैध प्रवासियों को आधार सुविधा ने देने को कहा है. वैसे कोर्ट ने स्कूलों, बैंक खाते, मोबाइल सिम आदि के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है लेकिन कुछ जगहों पर आधार कार्ड की अनिवार्यता बरक़रार रहेगी.

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यह फैसला प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 38 दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद 10 मई को मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामले में उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के एस पुत्तास्वामी की याचिका सहित कुल 31 याचिकाएं दायर की गई थीं. दरअसल, केंद्र ने आधार योजना का बचाव किया था कि जिनके पास आधार नहीं है उन्हें किसी भी लाभ से बाहर नहीं रखा जाएगा. सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में आधार कार्ड की अनिवार्यता सबसे प्रमुख है. सरकारी धन के दुरुपयोग और योजनाओं के साथ होने वाले फर्जीवाडे की वजह से आधार कार्ड की अनिवार्यता की मांग की गई थी. इसके साथ ही आधार को पैन नंबर से भी जोड़ने की व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट ने यथावत बनाए रखी  है.

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आपको बता दें कि पहले रिजर्व बैंक ने बैंक खातों को आधार कार्ड से लिंक करने का निर्देश दिया था. जिसे लेकर यह तर्क दिया गया था कि इससे मनी लॉन्ड्रिंग पर नकेल कसने में मदद मिलेगी. बैंक खाता खोलने के लिए भी बैंकों ने आधार कार्ड की अनिवार्यता रखी थी और पुराने खातों को भी आधार कार्ड से जोड़ने के लिए व्यवस्था करवाई गई थी.

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लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने बैंक खातों को आधार कार्ड से जोड़ने की व्यवस्था खारिज कर दी है.

Published by Chanchala Verma on 26 Sep 2018

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