86 साल के हुए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, बताते हैं उनके कार्यकाल की 5 प्रमुख उपलब्धियां

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भारत के 13 वें प्रधानमंत्री रह चुके डॉ. मनमोहन सिंह आज अपना 86 वां जन्मदिन मनाने जा रहे हैं. वह देश के पहले सिख प्रधानमंत्री थे. 22 फरवरी 2004 को वह देश के प्रधानमंत्री के रूप में चुने गए थे. भारत में उन्हें आर्थिक सुधारों का जनक कहा जाता है. जब देश आर्थिक कगार पर कठिन समय से गुजर रहा था उस समय वह तत्कालीन पीएम नरसिम्‍हा राव के कार्यकाल में वित्‍त मंत्री के पद पर थे. उस दौर में उन्होंने देश को आर्थिक मजबूती देने का प्रयास किया था और देश को आर्थिक तंगी से उभारा था.

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मनमोहन सिंह की ऐसे कईं उपलब्धियां हैं जिससे कि उनके कुशल राजनीतिज्ञ और व्यक्तित्व की पहचान होती है. इनमे से उनकी पांच प्रमुख ऐसे ही उपलब्धियां हम आज आपको बताने जा रहे हैं.

1. शिक्षा का अधिकार 

शिक्षा का अधिकार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ही देन है. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में राइट टू एजुकेशन यानी शिक्षा का अधिकार अस्तित्व में आया था. इस अधिकार के अनुसार 6 से 14 साल के सभी बच्चे को शिक्षा का अधिकार पूर्णतया मिले यह निश्चित किया गया था. और साथ ही इस उम्र के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा दी जाएगी.

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2. आर्थिक सुधार  

वर्ष 2004 से 2014 के कार्यकाल के बीच में देश में हुए सभी आर्थिक सुधारों का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को ही जाता है. जब उन्‍होंने प्रधानमंत्री का पद संभाल था उस समय देश का राजकोषीय घाटा घरेलू उत्पाद के 8.5 फीसदी के आसपास था. एक वर्ष में ही वे इसे 5.9 फीसदी पर लाने में कामयाब रहे थे. इससे पहले भी 1991 में मनमोहन सिंह ने वित्‍त मंत्री का पदभार संभाला था जिसके बाद उन्‍होंने देश में आर्थिक क्रांति ला दी थी.

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3. आधार कार्ड योजना 

वर्तमान के समय में भारत में हर जगह आधार कार्ड को सभी जगह अनिवार्य कर दिया है. लेकिन यह बहुत कम को ही पता है की इसकी शुरुआत मनमोहन के कार्यकाल में हुई थी. भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण सन 2009 में कांग्रेस की सरकार के समय गठित किया गया था. योजना का उद्देश्‍य देश के हर व्यक्ति को एक नंबर के जरिए पहचान देना और प्राथमिक तौर पर प्रभावशाली जनहित सेवाएं पहुंचाने के लिए इसे शुरू किया था.

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4. 100 दिन रोजगार के 

बेरोजगारी से जूझते देश में रोजगार गारंटी योजना की सफलता का श्रेय मनमोहन सिंह को जाता है. इसके तहत साल में 100 दिन का रोजगार और न्यूनतम दैनिक मजदूरी 100 रुपए तय की गई थी. इसे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम कहा जाता था लेकिन 2 अक्टूबर 2009 को इसका फिर से नामकरण किया गया था. मनरेगा यानी महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट 2005 ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत यूपीए के कार्यकाल में डॉक्टर मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल में शुरू की गई थी.

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5. न्यूक्लियर डील 

डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील की थी. साल 2005 में जब इस डील को अंजाम दिया गया उसके बाद भारत न्यूक्लियर हथियारों के मामले में शक्तिशाली देश बनकर उभरा था. इस डील के तहत यह सहमति बनी थी कि भारत अपनी इकॉनमी की बेहतरी के लिए सिविलियन न्यूक्लियर एनर्जी पर काम करता रहेगा.

Published by Yash Sharma on 26 Sep 2018

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