काफी शानदार रहा ट्रेनों में टॉफियां बेचने से लेकर महमूद के ‘कॉमेडी किंग’ बनने का सफर

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बॉलीवुड में आज देश का हर छोटा बड़ा कलाकार अपना करियर बनाना चाहता है. लेकिन हर कोई यहां अपनी मंजिल नहीं हासिल कर पाता है. हालांकि इतना मुश्किल भी नहीं है कि फिल्म इंडस्ट्री में अपना करियर बनाया न जा सके. अगर आपके अन्दर कुछ कर दिखाने का जज्बा है तो आप फिल्म इंडस्ट्री में क्या हर क्षेत्र में अपना मुकाम हासिल कर सकते हैं और करने वालों ने अपनी मेहनत से बॉलीवुड में अपनी पहचान भी अलग बनाई है.

अपनी एक्टिंग और मेहनत की दम पर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने वालों में ‘कॉमेडी किंग’ महमूद का नाम भी आता है. ‘कॉमेडी किंग’ महमूद 90 के दशक के फेमस कॉमेडी एक्टर थे. इन्होंने भारतीय सिनेमा की कई शानदार फिल्मों में काम किया है. तो चलिए जानते हैं ‘किंग ऑफ कॉमेडी’ का दर्जा हासिल करने वाले महमूद के बारे में कुछ खास बातें-

बचपन से एक्टिंग का शौक:

29 सितम्बर 1932 में जन्मे महमूद का कल जन्मदिन है. आज वे हमारे बीच भले ही मौजूद नहीं हैं लेकिन उनकी यादें आज भी हमारे बीच मौजूद हैं. महमूद के पिता मुमताज अली बॉम्बे टॉकीज स्टूडियो में काम करते थे. जबकि महमूद बचपन में लोकल ट्रेनो में टॉफियां बेचने का काम करते थे. बचपन से एक्टिंग का शौक रखने वाले महमूद ने काफी कम उम्र ही फिल्म ‘किस्मत’ में अशोक कुमार के बचपन का रोल करने को मिल गया था.

एक्टिंग के लिए बने ड्राइवर:

एक्टिंग का महमूद को इतना शौक था कि उन्होंने निर्माता ज्ञान मुखर्जी के यहां ड्राइवर की नौकरी करने का काम शुरू कर दिया था. वह भी इसलिए क्योंकि निर्माता ज्ञान मुखर्जी के साथ स्टूडियो में जाने का उन्हें मौका मिल जाता था. स्टूडियो में महमूद कलाकारों को करीब से समझने की कोशिश करते थे. ऐसा कहा जाता है कि फिल्म ‘नादान’ की शूटिंग के दौरान अभिनेत्री मधुबाला के सामने एक जूनियर कलाकार लगातार दस रीटेक के बाद भी अपना डायलॉग नहीं बोल पा रहा था. उस वक्त महमूद भी इधर मौजूद थे. तभी अचानक फिल्म निर्देशक हीरा सिंह ने महमूद को डायलॉग बोलने के कहा, फिर क्या जैसी ही निर्देशक ने महमूद से कहा वैसे ही तुरंत महमूद राजी हो गए और बिना रिटेक दिए एक बार में ही पूरा डायलॉग बोल दिया. इसके बाद एक बार में ही सीन ओके हो गया था.

पहली फ़ीस मिली थी 300 रुपए:

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Here is an out and out tapori song that became an out and out Evergreen classic song, and was iconic song if ever there was one. I'm sure when this song first appeared on the air waves, it must have taken everyone by storm. Listening to this audio itself is such a wonderful exhilarating experience, and when one watches the vedio of the song, the roof has no option but to fall down. Mehmood's comedy and Rafi Sahab's song may have done more to make this movie a success than the hamming of Manoj Kumar, the hero of this movie. This song has been beautifully sung by Rafi Sahab, composed by Shankar Jaikishan, penned by Shailendra and amazingly performed by Helen and Mehmood 👏👏😍😍. Hats off to all the great personalities for their great contribution 👒👒👏👏. Enjoy this wonderful song ❤. Movie – Gumnaam 1965 . . . #oldbollywoodmovies#mehmood#helen#mohammadrafi#legendofbollywood#gumnaam

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इस फिल्म में काम करने के बदले महमूद को 300 रुपए मिले थे. जबकि वे उस वक्त सिर्फ 75 रुपए महीने में ड्राइवर की नौकरी करते थे. इस फिल्म के बाद महमूद के करियर में चार चाँद लग गए थे. इस फिल्म के बाद इन्होंने ड्राइवर की नौकरी छोड़ जूनियर आर्टिस्ट एसोसिएशन बन फ़िल्में खोजने का काम शुरू कर दिया था. काफी मेहनत करने के बाद इन्हें ‘दो बीघा जमीन’, ‘जागृति’, ‘सीआईडी’, ‘प्यासा’ जैसी फिल्मों में छोटे मोटे रोल मिल भी गए थे.

राजकपूर के भाई का निभाया किरदार:

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Mukesh , Mehmood , Meena Kumari and Talat Mahmood. . Many of you might be knowing this but for those who dont …. . Mehmood was Meenaji's brother -in- law . He was married to her younger sister Madhuri(Maheleka/madhu) . . "He used to lovingly call Meenaji Na-Aapa and she used to call him Mude " . Mehmood recalls in his biography that he met Meenaji for the first time in the early 50's on the sets of an untitled film at Bombay talkies . Meenaji saw him playing table tennis and requested him toh teach her and that's how she learnt the sport🏓. . Also Singer Lucky ali is Mehmood and Madhuri's son and was very close to Meenaji. Colourized by #Shaheedhaniff _ #Meenakumari #Mukesh #Mehmood #Talatmahmood #Legends #Goldenera #Oldbollywood #whitesaree #Ladyinwhite #Mahjabeen

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साल 1958 में आई फिल्म ‘परवरिश’ में महमूद को एक शानदार भूमिका मिल गई थी. फिल्म में महमूद ने राजकपूर के भाई का किरदार निभाया था. जो दर्शकों को काफी पसंद भी आया था. इसके बाद महमूद फिल्म ‘छोटी बहन’ में नजर आए. इस फिल्म में काम करने के बदले महमूद को 6000 रुपए मिले थे. जो उस वक्त काफी मायने रखते थे.

‘एक चतुर नार करके श्रृंगार’ से हुए फेमस:

1961 में आई फिल्म ‘ससुराल’ में हास्य अभिनेता का किरदार कर महमूद फेमस हो गए थे. इस फिल्म के बाद 1968 में फिल्म ‘पड़ोसन’ में अपनी दमदार एक्टिंग दिखा के महमूद ने इंडस्ट्री में अपनी एक अच्छी खासी अलग ही पहचान बना ली थी. ‘पड़ोसन’ में महमूद ने नकारात्मक भूमिका निभाई थी जो दर्शको को काफी पसंद आई थी. इस फिल्म का गाना आज भी लोगों के जुवान पर रहता है. गाने के बोल हैं, ‘एक चतुर नार करके श्रृंगार’ इस गाने के बाद तो देश का बच्चा बच्चा उन्हें पहचानने लगा था.

तीन बार फिल्मफेयर पुरस्कार मिला:

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#N Nazar Lage Na Saathiyo! Happy Birthday and remembering one of the best and legendary singer Kishore Kumar on his 89th birth anniversary! What a singer and what a voice! I'm glad I chose this song for his birthday as the tune is sick and it gives such good vibes! Rajesh Roshan's melody is too good and his songs with Kishoreda were so unique! As for the song… How do you fit so many legendary actors in one screen and one song💯😂✨❤️ Dev Anand suiting Kishore Kumar the best! Kishore Kumar's son Amit Kumar singing for Mehmood, Prem Chopra, Ajit Khan and Amjad Khan😂👏🏻❤️ This is too good! RIP Kishore Kumar! Always loved ur voice and always will! ✨💙 #DesPardes #KishoreKumar #Kishoreda #birthday #birthanniversary #legend #rip #DevAnand #Mehmood #PremChopra #Ajit #AjitKhan #AmjadKhan #AmitKumar #RajeshRoshan #bollywood

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एक समय ऐसा आया कि महमूद ने एक्टिंग में अपनी सफलता के झंडे गाड़ दिए. शायद यहीं वजह रही कि फिर उन्हें करियर में तीन बार फिल्मफेयर पुरस्कार मिला. 300 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले महमूद 23 जुलाई 2004 को इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे.

Published by Lakhan Sen on 29 Sep 2018

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