अपनी सादगी और जीवन जीने के तरीके के लिए जाने जाते थे पूर्व प्रधानमंत्री शास्त्री

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भारतीय इतिहास के सबसे मशहूर राजनीतिज्ञ लालबहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को हुआ था. वह स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे. ऐसा शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो उन्हें पसंद नहीं करता होगा. उन्होंने 1964 से लेकर 1966 तक प्रधानमंत्री का कार्यभार संभाला था. वह देश के सबसे सम्मानित राजनीतिज्ञ में शुमार थे. उनका नारा ‘जय जवान-जय किसान’ बहुत लोकप्रिय हुआ था. लालबहादुर शास्त्री के अपोजिट लोग भी कभी उनकी आलोचना नहीं करते थे. उनकी सादगी और सादा जीवन जीने के तरीके के सभी कायल थे.

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शास्त्री के राजनीति काल में कभी भी उनके प्रतिद्विन्दी के तौर पर कोई भी खड़ा नहीं होता था. उनकी भाषण शैली का हर कोई व्यक्ति मुरीद था. ऐसे ही कईं घटनाओं और संस्मरणों से शास्त्री का जीवन भरा पड़ा है. लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री ने कुछ साल पहले मीडिया से बात करके उनके पिता के समय का एक किस्सा सभी से शेयर किया था. अनिल के मुताबिक देश में उस समय भयंकर सूखे की विपदा आन पड़ी थी.

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उस दौरान प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने अपने घर में घोषणा कर दी थी कि आज घर में खाना नहीं बनेगा. इस पर शास्त्री की पत्नी ने उनसे इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा था कि, ‘मैं देखना चाहता हूं कि मेरे बच्चे एक दिन भूखे रह सकते हैं या नहीं. उस दिन घर में खाना नहीं बना और जब किसी ने कोई शिकायत नहीं की तो अगले दिन पिताजी ने देशवासियों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने का आह्वान कर दिया ताकि सूखे की विकट समस्या से पैदा हुए खाद्यान्न संकट से निपटा जा सके’.

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देश के इतिहास में इससे पहले देश के किसी राजनेता ने ऐसी किसी प्रकार की घोषणा नहीं की थी. और इतना ही नहीं देश के हर नागरिक ने इस घोषणा का मान रखकर उसे माना भी था. लाल बहादुर शास्त्री का जनता के प्रति आत्मविश्वास था कि देशवासी उनकी बात सुनेंगे और उसे मानेंगे भी. और सच में एक दिन पूरे देश में किसी के भी घर की रसोई नहीं बनी थी.

Published by Yash Sharma on 02 Oct 2018

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