फरीदाबाद में उर्दू में होती है रामलीला, पाकिस्तान से आते हैं कलाकार

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बचपन में सभी ने रामलीला जरुर देखी होगी. अब उस समय टीवी का चलन भी उतना ज्यादा नहीं रहता था. शायद यहीं वजह थी कि उस समय लोग रामलीला देखना ज्यादा पसंद करते थे. ख़ास तौर पर रामलीला का आयोजन नवरात्रि के दौरान, दशहरा से पहले तक मंच पर हुआ करता था.  उस समय के लोग भगवान राम से जुड़ी और उनके जीवन की पूरी कहानी को जानने के लिए बेहद उतसुक भी रहा करते थे.

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रामलीला देखते वक्त जब अचानक लाइट चली जाना और रामलीला के बीच-बीच में फरमाइश होना भी बड़ा मजेदार लगता था. खैर धीरे-धीरे हमारें देश में रामलीला का चलन ख़त्म होते जा रहा है. जहां एक ओर रामलीला का चलन ख़त्म हो रहा है. वहीं दूसरे तरफ अपने देश में एक ऐसी रामलीला भी होती है. जहां देश से नहीं बल्कि विदेश से कलाकार आते हैं और रामलीला करते हैं. सुनकर आपको शायद यकीन न हो लेकिन यह सच है.

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जी हां! तो अब आपके दिमाग में यहीं सवाल आया होगा कि आखिर हमारे देश में ऐसी कौन सी रामलीला है जहां पर विदेश से कलाकार आते हैं? तो आइए आपका कीमती समय बर्बाद न करते हुए हम आपको बताते उस रामलीला का नाम जहां पर विदेश से कलाकार आते हैं. दरअसल हम बात कर रहे हैं फरीदाबाद की रामलीला की. इस रामलीला में सारे कलाकार हमारे पडोसी देश पाकिस्तान से आते हैं. चौंकाने वाली बात तो यह है कि यह रामलीला हिंदी भाषा के अलावा उर्दू भाषा में भी होती है.

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यह रामलीला का आयोजन आज से नहीं बल्कि कई सालों से किया जाता है. वे अपने पूर्वजों से सीख लेकर अभी तक उर्दू रामलीला जारी रखे हुए हैं. बता दें कि, आज पूरे देश में दशहरा मनाया जा रहा है. इस दिन गांव से लेकर शहर की गलियों में तक रावण कह दहन किया जाएगा. यह बात हम सभी जानते हैं कि यह त्योहार बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य का प्रतीक है. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन ही मां दुर्गा ने महिषासुर को मारा था इसलिए महिषासुर मर्दिनी के रुप में उनकी पूजा की जाती है.

Published by Lakhan Sen on 19 Oct 2018

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