बटन से लेकर विमान तक ये हैं वो 5 आविष्कार जिनका जनक है भारत

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भारत में पुराणों को काफी महत्व दिया जाता है और इन पुराणों के जरिए ही वर्तमान समय में लोगों को बहुत कुछ जानकरी मिल पा रही है. जिन ऋषि मुनियों ने इन पुराणों के रचना की है. उन्होंने ही कई आविष्कार भी किए थे. इन आविष्कार के बाद ही आज वर्तमान समय में आधुनिक विज्ञान का विस्तार हुआ है. जी हां, इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं भारत के पांच ऐसे आविष्कारों के बारे में जिनका जन्म भारत में हुआ है.

बटन:

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बटन का नाम भले ही सुनने में छोटा लगता है लेकिन बटन का शर्ट में कितना महत्व है यह हम सभी अच्छे से जानतें हैं. बटन का आविष्कार सबसे पहले भारत में हुआ था. मोहनजोदड़ो की खुदाई से पहले बटन का प्रमाण मिला था. तो आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि आज से कितने साल पहले बटन का आविष्कार हो चुका था.

पहिया:

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पहिए का आविष्कार आज से हजारों साल पहले भारत में हो चुका था. महाभारत और रामायण में भी रथों के उपयोग का वर्णन है. इससे ये साफ़ होता है कि हमारे देश में ही पहिए का आविष्कार हुआ था.

अस्त्र-शस्त्र:

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आज दुनिया के कई देशों के पास भले ही बड़ी-बड़ी मिसाइल, परमाणु बम हैं लेकिन असल में भारत ने इन सब चीजों का आविष्कार सदियों पहले कर लिया  था. भले ही आज परमाणु सिद्धांत शास्त्र के जनक जॉन बोतल को माना जाता है. लेकिन वास्तव में वे जनक नहीं हैं बल्कि जनक तो ऋषि कणाद हैं. क्योंकि जिस परमाणु सिद्धांत की आज हम बात करते हैं वह आज से 2500 वर्ष पूर्व बना दिया था. बता दें कि ऋषि कणाद ने वेदों में लिखे सूत्रों के आधार पर परमाणु सिद्धांत का प्रतिपादन किया था.

विमान:

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आज आप किसी से भी पूछेंगे कि विमान का आविष्कार किसने किया है तो सभी का उत्तर राइट ब्रदर्स ही होगा. लेकिन असल में विमान का आविष्कार राइट ब्रदर्स ने नहीं बल्कि महर्षि भारद्वाज ने किया था. इन्होंने हजारों वर्ष पहले विमान शास्त्र लिखा था. जिसमें हवाई जहाज बनाने की तकनीक का वर्णन किया गया था. साथ ही विमान शास्त्र में हवाई युद्ध के नियम व प्रकार का भी भारद्वाज ने वर्णन किया था.

शल्य चिकित्सा या प्लास्टिक सर्जरी:

आजकल के लोगों का मानना है कि प्लास्टिक सर्जरी विज्ञान की देन हैं. खास तौर पर विदेश में प्लास्टिक सर्जरी होती है. लेकिन आज से करीब 3000 साल पहले सुश्रुत ने प्लास्टिक सर्जरी करना शुरू किया था. सुश्रुत ने प्लास्टिक सर्जरी का इस्तेमाल युद्ध में घायल होने वाले योद्धाओं को ठीक करने में किया था.

Published by Lakhan Sen on 02 Nov 2018

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