7 नवंबर को मनाई जा रही देश में दीवाली, सुख और समृद्धि के लिए होता है माता का पूजन

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त्यौहारों के सीजन में सभी लोग बड़ी धूम धाम से सारे पर्व और त्यौहार मनाते नजर आते हैं. गणेश उत्सव और नवरात्रि में गरबे की धूम के बाद भारतवर्ष में दीपावली का त्यौहार नजदीक है. यह त्यौहार हिन्दू रीति-रिवाज़ के माध्यम से हिन्दुओं का सबसे बड़ा और पवित्र त्यौहार माना जाता है. मान्यता के आधार पर ऐसा माना जाता है कि इस दिन प्रभु श्री राम अपने 14 वर्ष के वनवास काल से लौटकर अपने प्रजा और राज्य अयोध्या में वापस आए थे.

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कईं सालों से भारत में इस त्यौहार को विशेष तौर पर मनाने की प्रथा है. पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व में धनतेरस, रूपचौदस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और अंतिम दिन भैया दूज मनाई जाती है. इन पांचो दिन में से दीपावली का दिन सबसे महत्वपूर्ण होता है. इस दिन सभी लोग लक्ष्मी माता की पूजा अर्चना करते हैं. साथ ही अपने घर और परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना भी करते हैं.

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भारत में इस साल दीवाली 7 नवम्बर को मनाई जाएगी. लेकिन कहा जा रहा है कि भारत के दक्षिण के कुछ हिस्सों जैसे तमिनाडु, केरल और कर्नाटक में दीवाली 6 नवम्बर को मनाई जाएगी. इसके साथ ही सिंगापुर में रहने वाले भारतीय भी इन तीन राज्यों के साथ ही दिवाली मनाएंगे यानी सिंगापुर में भी 6 नवंबर को ही दिवाली मनाई जाएगी.

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इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा के तीन मुहूर्त निकले है जिसमें उनकी पूजा-अर्चना करना अतिउत्तम साबित होगा. लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त इस बार शाम 17:57 से 19:53 तक, प्रदोष काल: शाम 17:27 बजे से 20:06 बजे तक, वृषभ काल: 17:57 बजे से 19:53 बजे से तक रहेगा. माता लक्ष्मी की पूजा आराधना को विधिवत तरीके से करने के लिए पूजन में सबसे पहले श्री गणेश जी का ध्यान करें. इसके बाद गणपति को स्नान कराएं और नए वस्त्र और फूल अर्पित करें.

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इसके बाद देवी लक्ष्मी का पूजन शुरू करें. मां लक्ष्मी की प्रतिमा को पूजा स्थान पर रखें. मूर्ति में मां लक्ष्मी का आवाहन करें और हाथ जोड़कर उनसे प्रार्थना करें कि वह आपके घर आएं और ढेर सारा आशीर्वाद दें. इसके बाद लक्ष्मी जी को स्नान कराएं. स्नान पहले जल का और फिर पंचामृत और फिर वापिस जल से स्नान कराएं. उन्हें वस्त्र अर्पित करें. वस्त्रों के बाद आभूषण और माला पहनाएं. इसके बाद इत्र अर्पित कर कुमकुम का तिलक लगाएं. अब धूप व दीप जलाएं और माता के पैरों में गुलाब के फूल अर्पित करें. इसके बाद बेल पत्र और उसके पत्ते भी उनके पैरों के पास रखें. 11 या 21 चावल अर्पित कर आरती करें. आरती के बाद परिक्रमा करें. अब उन्हें भोग लगाएं.

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इस तरह विधिवत लक्ष्मी माता की पूजा कर उन्हें प्रसन्न करें और उनसे खुशहाली की कामना करें.

Published by Yash Sharma on 04 Nov 2018

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