बिहार का बिरहोर टोला है मूलभूत सुविधाओं से वंचित, फल-फूल खाकर करते हैं जीवन यापन

Get Daily Updates In Email

भारत में जहां लोग डिजिटल इंडिया और सोशल नेटवर्क की बात करते है. वहीं देश में कईं सारी ऐसी जगह है जहां पर लोग अभी तक भी अपनी मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं. इंटरनेट और मोबाइल तो दूर वहां के निवासी अपने खाने-पीने और रहने की वस्तुओं से भी बहुत दूर हैं. बहुत से लोग देश में अभी भी फल-फूल खाकर ही अपने जीवन का गुजारा कर रहे हैं.

courtesy

ऐसे ही भारत में बिहार राज्य के गया जिले का कठौतिया केवाल पंचायत का बिरहोर टोला है. यह जाति अब बिहार में विलुप्ति की कगार पर है. वहां की सरकार ने इनके उत्थान के लिए कईं प्रयास भी किए पर सब विफल रहे. यह लोग अपने खाने-पीने की वस्तुओं को लेने के लिए आसपास के क्षेत्र में जाकर बेल और दातुन जैसी वस्तुएं बेचकर खरीद कर लाते हैं. यहां के लोग पुरानी सभ्यता के साथ ही अपना जीवनयापन करते हैं.

courtesy

120 लोगों के इस टोले के लोग बिल्कुल भी साक्षर नहीं हैं. उस क्षेत्र में स्कूल तो हैं लेकिन वह कभी-कभार ही खुल पाता है. यहां के लोग भारतीय रुपए को भी रंग देखकर ही पहचान पाते हैं. साथ ही आपस में बातचीत के लिए ये लोग वर्षो पुरानी भाषा का प्रयोग करते हैं. यह लोग बातचीत के लिए संथाली भाषा का प्रयोग करते है. अन्य लोगों से बात करने में भी संकोच करते हैं. टोले के एक-दो लोग टूटी-फूटी ङ्क्षहदी व मगही मिश्रित भाषा का प्रयोग कर पाते हैं. उनकी बोली आमलोग समझ नहीं पाते हैं. साथ ही उन्हें दुनियादारी की कोई समझ नहीं है. इस क्षेत्र में 11 चापाकल, एक आंगनबाड़ी केंद्र, एक प्राथमिक स्कूल और सोलर सिस्टम सहित कुछ मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई थी. लेकिन उनके सही ढंग से रख-रखाव नहीं हो पाने के कारण वह सही रूप से संचालित नहीं हो पाई. 11 चापाकल में से 8 बंध भी हो चुके है.

courtesy

उस क्षेत्र में लोगो के लिए शौचालयों की सुविधा भी सही ढंग से उपलब्ध नहीं है. और जो शौचालय उपलब्ध है उनकी स्थिति बहुत जर्जर हो चुकी है. वहां के विकास अधिकारी कुमुद रंजन का कहना है कि बिरहोर टोला में समय-समय पर भ्रमण कर उनकी स्थिति का आंकलन किया जाता है. कई लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना में नाम दिया गया है.

Published by Yash Sharma on 05 Nov 2018

Related Articles

Latest Articles