रुस्तम-ए-हिन्द के नाम से जाने जाते थे दारा सिंह, अपने पूरे करियर में नहीं हारी थी एक भी कुश्ती

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फ़िल्म और कुश्ती में जाना माना नाम दारा सिंह रंधावा का जन्म 19 नवंबर 1928 को पंजाब में अमृतसर में हुआ था. दारा सिंह की माता बलवंत कौर और पिता सूरत सिंह रंधावा थे. दारा एक ऐसे पहलवान थे जिनका सीना 53 इंच का था. वह इतने लंबे-चौड़े थे कि उन्होंने 200 किलो वजनी रेसलर को उठाकर फेंक दिया था.

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दारा सिंह वह शख्स थे जिन्होंने कुश्ती के सारे 500 मुकाबले जीतकर दुनिया को अपनी ताकत का लोहा मनवाया था. अपने छत्तीस साल के कुश्ती के करियर में कोई ऐसा पहलवान नहीं था जिसे दारा सिंह ने अखाड़े में हराया नहीं हो. दारा सिंह ने अपने समय के सभी बड़े पहलवानों को हराया था. जिसके लिए उन्हें ‘रुस्तम-ए-पंजाब’ और ‘रुस्तम-ए-हिंद’ का खिताब दिया गया था.

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83 साल की उम्र में भी दारा सिंह नाश्ता मिस करके सिर्फ लंच और डिनर ही किया करते थे. खुद को फिट रखने के दारा सिंह रोजाना दस सिल्वर के वर्क के साथ 8 रोटी एक समय में खाते थे. इसके अलावा दारा सिंह रोजाना दो लीटर दूध और आधा किलो मीट का खाया करते थे. दारा सिंह रोजाना अपनी डाइट में 100 ग्राम बादाम, मुरब्बा और घी को जरूर शामिल करते थे. कसरत करने के बाद दारा सिंह रोजाना ठंडाई पीते थे. इसके अलावा वह चिकन या फिर सूप पीने के भी शौकीन थे.

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उन्होंने कुश्ती के साथ-साथ एक्टिंग की दुनिया में भी कदम रखा और कई फिल्मों व सीरियल्स में काम किया. बॉलीवुड में दारा सिंह की एंट्री फिल्म ‘संगदिल’ से हुई, जो सन 1952 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म में एक्टर दिलीप कुमार और मधुबाला थे. रामानंद सागर के शो रामायण में उन्होंने हनुमान का किरदार निभाया था. हनुमान के किरदार से उन्हें घर-घर में ख्याति मिली थी. इसके बाद उन्होंने डायरेक्शन के क्षेत्र में भी कदम रखा. दारा सिंह ने साल 1970 में पहली बार फिल्म ‘नानक दुखिया सब संसार’ को डायरेक्ट किया था. वह फिल्म उस समय में ब्‍लॉकबस्‍टर साबित हुई थी. आखिरी बार दारा सिंह को फिल्‍म जब वी मेट में देखा गया था.

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अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के वक्त भारतीय जनता पार्टी ने साल 2003 में उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाया था. वह पहले ऐसे खिलाड़ी थे जिसे राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था.

Published by Yash Sharma on 19 Nov 2018

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