आज के दिन ही जारी हुआ था आजाद भारत का पहला डाक टिकट, लिखा था ‘जय हिंद’

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एक समय था जब हमारे देश में अपने से दूर रह रहे रिश्तेदारों से या फिर परिजनों से पत्र के माध्यम से ही बात हो पाती थी. अगर कभी आपने किसी को पत्र लिखा भेजा होगा तो आपको यह बात अच्छे से पता होगी कि पत्र में वजन के हिसाब से डाक टिकट लगती है. भारतीय पोस्ट ऑफिस से ये टिकट लेनी होती है. इसके बाद इन्हें पत्र पर लगाना होता है. इसके बाद ही पोस्ट के जरिए कोई पत्र एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जाता है.

बता दें कि वर्तमान समय में डाक टिकट कई तरह की कीमत में उपलब्ध होती है. लेकिन क्या आपको पता है आजाद भारत का पहला डाक टिकट कब और कितने रुपए का था? जी हां! इस पोस्ट में हम आपको बताने वाले हैं आजाद भारत के पहले डाक टिकट के बारे में कुछ खास बातें जो शायद ही अभी तक आपको पता होंगी.

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आजाद भारत का पहला डाक टिकट 21 नवंबर 1947 को जारी हुआ था. इस डाक टिकट का उपयोग केवल देश के अंदर डाक भेजने के लिए किया जाता है. इस टिकट पर भारतीय ध्वज का चित्र बना हुआ है. चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस डाक टिकट की कीमत साढ़े तीन आना यानि चौदह पैसा थी. सुनकर शायद आपको यकीन न हो लेकिन यह बात बिल्कुल सच है. बता दें कि डाक टिकट की यह राशि 1947 तक ‘आना’ में ही रही थी. इसके बाद इसको पैसे में बदल दिया गया था. साल  1947 में एक रुपया ‘100 पैसे’ का नहीं बल्कि ’64 पैसे’ यानि 16 आने का होता था. खास बात तो यह थीं कि इन दिनों इकन्नी, चवन्नी और अठन्नी ही चलती थी. अब तो यह सब देखने को तक नहीं मिलती हैं.

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बता दें कि आजाद भारत की पहली डाक टिकट पर भी ‘जय हिन्द’ लिखा हुआ था. इस टिकट पर ‘जय हिन्द’ लिखने के पीछे एक वजह थी. दरअसल 15 अगस्त 1947 को नेहरू जी ने आजादी के बाद लाल किले से अपने पहले भाषण का समापन, ‘जय हिन्द’ से किया था. इसके बाद डाक टिकट पर ‘जय हिन्द’ लिखा गया था. नेहरू जी के इस भाषण की सूचना भी डाकघरों को भेजी गई थी. साथ ही यह कहा गया था कि जब तक नए डाक टिकट न आ जाए तब तक डाक टिकट चाहे अंग्रेज राजा जॉर्ज की मुखाकृति क्यों न हो उसमें  मुहर ‘जय हिन्द’ की लगाई जाए.

Published by Lakhan Sen on 21 Nov 2018

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