‘नमक हराम’ के बाद फिर कभी साथ फिल्मों में नजर नहीं आए अमिताभ और राजेश खन्ना

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आज के ही दिन भारतीय सिनेमा की सुपरहिट फिल्म ‘नमक हराम’ रिलीज हुई थी. इस फिल्म में भारतीय सिनेमा के दो दिग्गज अभिनेता बड़े पर्दे पर नजर आए थे. दरअसल फिल्म में बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन और मेगास्टार राजेश खन्ना मुख्य किरदार में नजर आए थे. 23 नवंबर साल 1973 को रिलीज हुई इस फिल्म ने कई रिकार्ड बनाए थे. अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना की एक्टिंग ने तो लोगों का दिल जीत लिया था. इस फिल्म से जुड़ें कुछ खास किस्से आज हम आपको बताने जा रहे हैं.

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Namak Haraam November 22, 1973. When Khanna was offered Namak Haraam, he was to play Vicky, the spoilt brat, but he opted for Somu, the conscientious poor man, for he is the one who dies in the end. Following the success of Safar and Anand, Khanna’s superstition about his onscreen death warranting a hit came up once again and he asked for the script to be rewritten so that Somu would suit his persona. Again, like Anand, he wasn’t bothered about Bachchan being cast as Vicky. His decision to play Somu changed the screen length of the role. With his role now not only the longer of the two but also author-backed in every sense, with enough histrionics and punches as far as dialogues went, and some brilliant songs to be shot on him, Khanna was sure that the result would be on the lines of Anand. Vishwas Pandya, son of Jayendra Pandya, one of the three producers of Namak Haraam, recalls how Khanna was confident that he would walk all over Bachchan—or anyone else, for that matter. When the film was finally released, the outcome was different. Bachchan ended up walking away with most of the glory. It is also obvious that Khanna had already achieved dizzying heights; so even a sterling performance could do only so much for him. But, for Bachchan, this was just the beginning. In the climax of Anand, when the audience saw Khanna die on-screen, it didn’t bother about anyone else; but in Namak Haraam, Khanna’s cinematic death ended up giving Bachchan a new lease of life. Caption courtesy Gautam Chintamani of Outlook India. @amitabhbachchan #namakharaam #45retroyears #namakharam #hrishikeshmukherjee #rajeshkhanna #superstar #amitabhbachchan #angryyoungman #rekha #anand #simigarewal #asrani #rdburman #diyejaltehain #mainshairbadnaam #nadiyasedariya #kishorekumar #70sbollywood #hindifilms #bollywood #retrobollywood #indianfilms #indiancinema

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इस फिल्म में दोनों ही दिग्गज स्टार आखिरी बार नजर आए थे. इस फिल्म के बाद दोनों स्टार फिर कभी भी किसी फिल्म में साथ नजर नहीं आए. ऐसा कहा जाता है कि फिल्म ‘नमक हराम’ जिस समय रिलीज हुई थी. इस वक्त राजेश खन्ना बड़े पर्दे से अपनी धीर-धीरे छवि खो रहे थे. जबकि अमिताभ बच्चन के लिए यह समय काफी खास रहा है. क्योंकि जब यह फिल्म रिलीज हुई थी उस वक्त अमिताभ बच्चन परदे पर धीरे-धीरे चमकना शुरू हुए थे. फिल्म ‘नमक हराम’ से पहले दोनों स्टार फिल्म ‘आनंद’ में काम कर चुके थे.

फिल्म ‘नमक हराम’ से जुड़े वैसे तो कई किस्से हैं लेकिन आज हम आपको सबसे खास किस्सा बताते हैं. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन को अंत में मरना होता है. लेकिन यह बात राजेश खन्ना को पता नहीं थी. जैसे ही उन्हें इस बात का पता चला कि अमिताभ को फिल्म के अंत में मरना है तो उन्हें यह सीन बिल्कुल भी रास नहीं आया था. दरअसल राजेश खन्ना को अच्छे से पता था कि जब कोई कलाकर फिल्म के अंत में मरता है तो उस पर दर्शकों पर काफी ध्यान जाता है.

फिल्म के निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने फिल्म की कहानी में कुछ बदलाव किए इसके बाद कहानी में मरने का रोल राजेश खन्ना के पास चला गया था. इस तरह से फिल्म में राजेश खन्ना को मरना था और अमिताभ को उनकी मौत का बदला लेना था. इस कहानी के साथ बाद में फिर फिल्म बड़े पर्दे पर रिलीज की गई थी.

चौंकाने वाली बात तो यह है कि राजेश खन्ना के द्वारा सीन बदलने के बाद भी उन्हें फिल्म से उतनी तवज्जो नहीं मिली थी. ज्यादातर दर्शकों को फिल्म में अमिताभ बच्चन का अभिनय पसंद आया था. दर्शकों की यह प्रतिक्रया देखकर राजेश खन्ना ने अमिताभ के साथ कभी न फिल्म करने का फैसला ले लिया था.

Published by Lakhan Sen on 23 Nov 2018

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