फिटनेस जांचने के लिए किया जाता है यो यो टेस्ट, सबसे पहले फुटबॉल और हॉकी में हुआ था उपयोग

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दुनियाभर में खिलाड़ियों के बीच यो यो टेस्ट को लेकर काफी चर्चा हो रही है. यह टेस्ट आजकल पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है. यो यो टेस्ट सबसे पहले फुटबॉल खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए बनाया गया था बाद में इसे हॉकी के खेल में भी इस्तेमाल किया जाने लगा है. बात करें क्रिकेट के खेल की तो इसे सबसे पहले ऑस्ट्रलिया के खिलाड़ियों के लिए अनिवार्य किया गया था लेकिन अब इस टेस्ट का इस्तेमाल भारत सहित विश्व की हर क्रिकेट टीम में किया जाता है.

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आजकल भारत की क्रिकेट टीम में खिलाडियों का चयन केवल इसी यो यो टेस्ट के आधार पर किया जाता है. यदि कोई खिलाड़ी बहुत अच्छी फॉर्म में है लेकिन इस टेस्ट में फेल हो जाता है तो उसे भारतीय क्रिकेट टीम में सेलेक्ट नहीं किया जाता है. यो यो टेस्ट खिलाड़ी की फिटनेस और स्टेमिना को जांचने के लिए किया जाता है. यह टेस्ट पूरी तरह से टेक्नोलॉजी की मदद से लिया जाता है. भारत में इस टेस्ट का आयोजन राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी, बैंगलोर में लिया जाता है. बैंगलोर की इस अकादमी में ही इस टेस्ट का सॉफ्टवेयर इन्सटाल्ड है.

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भारत में यो यो टेस्ट को पास करने के लिए एक पैमाना भी सेट किया गया है. जिसके चलते हर खिलाड़ी को निर्धारित समय में इस टेस्ट को खत्म करते हुए कम से कम 16.1 अंक हासिल करने होते हैं. जो भी खिलाड़ी 16.1 अंक से कम नंबर लाता है तो वह इस टेस्ट में फेल हो जाता है और उस खिलाड़ी को टीम से जगह नहीं दी जाती है.

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इस टेस्ट के दौरान कई शंकुनुमा आकृति की मदद से 20 मीटर की दूरी पर दो लाइनें बनाई जाती हैं. खिलाड़ी रेखा के पीछे अपना पांव रखकर शुरुआत करता है और निर्देश मिलते ही दौड़ना शुरू करता है. उसे 20 मीटर की दूरी पर बनी दो पंक्तियों के बीच लगातार दौड़ना होता है और जब बीप बजती है तो मुड़ना होता है. इसके बाद भी खिलाड़ी दोनों छोरों पर तय समय के मुताबिक तेज नहीं दौड़ पाता तो उसका परीक्षण रोक दिया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया को साफ्टवेयर के आधार पर किया जाता है. इसके नतीजों को रिकॉर्ड किया जाता है.

Published by Yash Sharma on 24 Nov 2018

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