अपनी अद्भुत कलाकृति, सौन्दर्य और अनोखी महिमा के लिए प्रसिद्ध हैं भारत के ये 5 प्रमुख सूर्य मंदिर

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भारत में अलग अलग जगहों पर कईं तरह के देवी-देवताओं के भव्य मंदिर हैं. जहां हजारों, लाखों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं. इनमें से कुछ ऐसे भी मंदिर है जो अपनी किसी विशेषता के लिए बहुत मशहूर हैं. देश में पांच ऐसे सूर्य मंदिर हैं जो अपनी विशेष भव्यता और अनोखी महिमा के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं तो चलिए आपको बताते हैं कौन से हैं ये मंदिर

 

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1. सूर्य मंदिर, मोढ़ेरा

यह सूर्य मंदिर गुजरात के मोढ़ेरा में स्थित है. मंदिर अहमदाबाद से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस मंदिर का निर्माण सम्राट भीमदेव सोलंकी प्रथम ने करवाया था. मंदिर के गर्भगृह के अंदर की लंबाई 51 फुट 9 इंच तथा चौड़ाई 25 फुट 8 इंच है. मंदिर के सभामंडप में कुल 52 स्तंभ हैं. इस मंदिर का निर्माण कुछ इस तरह किया गया था कि जिसमें सूर्योदय होने पर सूर्य की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह को रोशन करे.

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2. सूर्य मंदिर, कोणार्क

ओडिशा राज्य में पुरी के निकट कोणार्क का सूर्य मंदिर स्थित है. कोणार्क सूर्य मंदिर सूर्य देवता को समर्पित है. रथ के आकार में बनाया गया यह मंदिर भारत की मध्यकालीन वास्तुकला का अनोखा उदाहरण है. यहां की सूर्य प्रतिमा पुरी के जगन्नाथ मंदिर में सुरक्षित रखी गई है. सूर्य मंदिर समय की गति को भी दर्शाता है जिसे सूर्य देवता नियंत्रित करते हैं. पूर्व दिशा की ओर जुते हुए मंदिर के 7 घोड़े सप्ताह के सातों दिनों के प्रतीक हैं.

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3. मार्तंड सूर्य मंदिर, अनंतनाग

यह मंदिर जम्मू कश्मीर राज्य के पहलगाम से निकट अनंतनाग में स्थित है. इस मंदिर का निर्माण मध्यकालीन युग में 7वीं से 8वीं शताब्दी के दौरान हुआ था. इसमें 84 स्तंभ हैं जो नियमित अंतराल पर रखे गए हैं. इस मंदिर से कश्मीर घाटी का खूबसूरत दृश्य भी देखा जा सकता है.

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4. सूर्य मंदिर, बेलाउर

इस मंदिर का निर्माण राजा सूबा ने करवाया था. बिहार के भोजपुर जिले के बेलाउर गांव के पश्चिमी एवं दक्षिणी छोर पर अवस्थित वेलाउर सूर्य मंदिर काफी प्राचीन है. राजा द्वारा बनवाए 52 पोखरों में से एक पोखर के मध्य में यह सूर्य मन्दिर स्थित है. यहां छठ महापर्व के दौरान प्रति वर्ष एक लाख से अधिक श्रद्धालु आते हैं.

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5. सूर्य मंदिर, झालरापाटन

राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित यह सूर्य मंदिर बहुत प्राचीन और दर्शनीय स्थल है. वास्तुकला की दृष्टि से भी यह मंदिर अहम है. इसका निर्माण दसवीं शताब्दी में मालवा के परमार वंशीय राजाओं ने करवाया था. मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा विराजमान है. इसे पद्मनाभ मंदिर भी कहा जाता है.

Published by Yash Sharma on 25 Nov 2018

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